जवानों की सुरक्षा के लिए छात्राओं ने बनाई AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी, एंटी अटैक और संचार सिस्टम से है लैस 

भाई-बहन के अटूट प्रेम और रक्षा के संकल्प का पर्व रक्षाबंधन इस बार काशी में देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की सुरक्षा और राष्ट्रसेवा की भावना से भी जुड़ने जा रहा है। काशी के चर्चित युवा नवाचारी और ‘लाल जूनियर साइंटिस्ट’ के नाम से पहचान बनाने वाले श्याम चौरसिया के नेतृत्व में एक निजी स्कूल की छात्राओं ने जवानों के लिए अनोखी ‘AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी’ तैयार की है। देखने में यह राखी जैसी दिखाई देती है, लेकिन इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और संचार तकनीक का प्रयोग किया गया है।
 

वाराणसी। भाई-बहन के अटूट प्रेम और रक्षा के संकल्प का पर्व रक्षाबंधन इस बार काशी में देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की सुरक्षा और राष्ट्रसेवा की भावना से भी जुड़ने जा रहा है। काशी के चर्चित युवा नवाचारी और ‘लाल जूनियर साइंटिस्ट’ के नाम से पहचान बनाने वाले श्याम चौरसिया के नेतृत्व में एक निजी स्कूल की छात्राओं ने जवानों के लिए अनोखी ‘AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी’ तैयार की है। देखने में यह राखी जैसी दिखाई देती है, लेकिन इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और संचार तकनीक का प्रयोग किया गया है।

छात्राओं और श्याम चौरसिया का दावा है कि इस प्रोटोटाइप को भविष्य में और विकसित कर सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के बीच संचार तथा सुरक्षा व्यवस्था में उपयोगी बनाया जा सकता है। रक्षाबंधन के अवसर पर तैयार की गई इस राखी का उद्देश्य केवल भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधना नहीं, बल्कि देश की रक्षा में दिन-रात जुटे सैनिकों के प्रति सम्मान और उनके सुरक्षित रहने की कामना को तकनीक से जोड़ना है।


पहले भी जवानों की सुरक्षा पर काम कर चुके हैं श्याम
श्याम चौरसिया इससे पहले भी जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई तकनीकी प्रोटोटाइप तैयार कर चुके हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक आर्मी हैंड ग्लव्स, आर्मी एंटी अटैक सिस्टम और AI आर्मी जैकेट जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। वहीं महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने तकनीक आधारित स्मार्ट लिपस्टिक और स्मार्ट झुमका जैसे प्रोटोटाइप तैयार किए हैं।


इसी कड़ी में इस बार उन्होंने छात्राओं को साथ लेकर रक्षाबंधन को एक अलग संदेश देने का प्रयास किया है। छात्राओं ने तकनीक, रचनात्मकता और देशभक्ति को जोड़ते हुए ऐसी राखी तैयार की है, जिसे जरूरत के मुताबिक आगे और विकसित किया जा सकता है।


रक्षा मंत्रालय को भेजा ईमेल, जवानों तक राखी पहुंचाने की मांग
श्याम चौरसिया ने बताया कि तैयार की गई राखी अभी एक प्रोटोटाइप है और इसे जवानों की जरूरत के अनुरूप और बेहतर बनाया जा सकता है। छात्राओं और स्कूल प्रबंधन की ओर से रक्षा मंत्रालय को ईमेल भेजकर रक्षाबंधन के अवसर पर यह राखी जवानों को सौंपने के लिए समय मांगा गया है।

इसके अलावा छात्राएं वाराणसी स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में भी पत्रक देने की तैयारी कर रही हैं। छात्राएं प्रधानमंत्री से मांग करेंगी कि यह विशेष राखी देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक पहुंचाने में सहयोग किया जाए, ताकि रक्षाबंधन के दिन काशी की बेटियों का यह संदेश सैनिकों तक पहुंच सके।


2.1 इंच डिस्प्ले से लेकर कैमरा-माइक्रोफोन तक
राखी तैयार करने वाली छात्रा आंशिका पासवान ने बताया कि इसे तैयार करने में कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें करीब 2.1 इंच का डिस्प्ले, ट्रांसमीटर-रिसीवर, ब्लूटूथ मॉड्यूल, कैमरा, माइक्रोफोन और 3.7 वोल्ट की बैटरी लगाई गई है।

छात्राओं के अनुसार इसमें सोलर पावर के साथ सेल्फ-चार्जिंग सिस्टम देने का भी प्रयास किया गया है। प्रोटोटाइप में सैटेलाइट आधारित डिस्प्ले की अवधारणा को शामिल किया गया है, ताकि ऐसे क्षेत्रों में जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं हो, वहां वैकल्पिक संचार तकनीक विकसित करने की दिशा में काम किया जा सके।

हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान मॉडल एक प्रयोगात्मक प्रोटोटाइप है और वास्तविक सैन्य उपयोग के लिए इसे विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण, सुरक्षा मूल्यांकन और आवश्यक तकनीकी मानकों के अनुरूप विकसित किए जाने की जरूरत होगी।


करीब 70 ग्राम वजन, तीन महीने में तैयार हुआ प्रोटोटाइप
छात्रा रुचि त्रिपाठी ने बताया कि इस विशेष राखी का वजन करीब 70 ग्राम है। इसे तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगा और इसके निर्माण पर करीब एक लाख रुपये की लागत आई है।

छात्राओं का कहना है कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि रक्षाबंधन केवल पारिवारिक रिश्तों का पर्व नहीं, बल्कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। जिस तरह बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करती है, उसी भावना को उन्होंने सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचाने का प्रयास किया है।


राखी में तकनीक और देशभक्ति का संगम
श्याम चौरसिया ने कहा कि छात्राओं द्वारा तैयार यह प्रोटोटाइप तकनीक और भावनात्मक जुड़ाव का अनूठा उदाहरण है। इसका उद्देश्य जवानों के लिए ऐसी तकनीक विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाना है, जो कठिन और दुर्गम परिस्थितियों में उनके काम आ सके।

रक्षाबंधन से ठीक पहले तैयार की गई AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी ने छात्राओं की वैज्ञानिक सोच, नवाचार और देश के जवानों के प्रति सम्मान को एक मंच पर ला दिया है। अब छात्राओं की नजर इस बात पर है कि रक्षा मंत्रालय और संबंधित विशेषज्ञ इस प्रोटोटाइप को किस तरह देखते हैं और क्या इसे आगे तकनीकी रूप से विकसित करने का अवसर मिलता है।