काशी में पहली बार बनेंगे थीमैटिक पार्क, संविधान से लेकर जीआई और वार मेमोरियल तक दिखेगी शहर की सांस्कृतिक विरासत
पहले चरण में नील कॉटेज पार्क और बादशाह बाग पार्क का होगा विकास
नील कॉटेज पार्क बनेगा संविधान पार्क, बादशाह बाग बनेगा वार मेमोरियल पार्क
कुल नौ पार्कों को अलग-अलग थीम पर विकसित करने की योजना
जीआई पार्क में बनारस के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की मिलेगी जानकारी
कबीर दास, संगीत, वेस्ट टू वंडर और अन्य थीम आधारित पार्क भी होंगे विकसित
आधुनिक लाइटिंग, डिजिटल डिस्प्ले, मूर्तियां और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं
रखरखाव के लिए 110 मालियों की नियुक्ति, नगर निगम विकसित करेगा अपनी नर्सरी
रिपोर्ट- ओमकार नाथ
वाराणसी। धर्म और संस्कृति की राजधानी काशी अब अपने पार्कों के माध्यम से भी इतिहास, विरासत और राष्ट्रभावना की नई पहचान गढ़ने जा रही है। नगर निगम ने शहर के विभिन्न उद्यानों को अलग-अलग विषयों पर विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस परियोजना के तहत पहली बार वाराणसी में 'थीमैटिक पार्क' विकसित किए जाएंगे, जहां हर पार्क किसी विशेष विषय पर आधारित होगा। इन पार्कों का उद्देश्य केवल हरियाली और मनोरंजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नागरिकों, बच्चों और पर्यटकों को शिक्षा, संस्कृति, इतिहास और स्थानीय विरासत से जोड़ना भी है।
मलदहिया नील कॉटेज पार्क बनेगा संविधान पार्क, बादशाह बाग वार मेमोरियल पार्क
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव के अनुसार, पहले चरण में दो पार्कों का विकास किया जा रहा है। मलदहिया स्थित नील कॉटेज पार्क को संविधान पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां भारतीय संविधान की मूल भावना, संविधान निर्माताओं के योगदान, मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों को आधुनिक माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं बादशाह बाग पार्क को वार मेमोरियल पार्क का स्वरूप दिया जाएगा, जिसमें देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की गाथाएं, सैन्य इतिहास और राष्ट्रभक्ति से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी।
नौ पार्कों का अलग-अलग थीम पर होगा विकास
योजना के तहत शहर के कुल नौ पार्कों को अलग-अलग थीम पर विकसित किया जाएगा। दुर्गाकुंड पार्क को कबीर दास पार्क बनाया जाएगा, जहां संत कबीर के जीवन, उनके दोहों, दर्शन और सामाजिक संदेशों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा कैंटोनमेंट क्षेत्र में जीआई पार्क विकसित होगा, जिसमें बनारसी साड़ी, गुलाबी मीनाकारी, लकड़ी के खिलौने, धातु शिल्प सहित वाराणसी के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। वेस्ट टू वंडर पार्क, ताल पार्क और संगीत एवं सांस्कृतिक विरासत पर आधारित अन्य थीम पार्क भी इस परियोजना का हिस्सा होंगे।
पार्कों में लाइटिंग, डिजिटल डिस्प्ले की रहेगी व्यवस्था
इन पार्कों में आधुनिक लाइटिंग, आकर्षक मूर्तियां, डिजिटल डिस्प्ले, सूचना पट्ट, बच्चों के लिए मनोरंजन क्षेत्र और बैठने की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। नगर निगम का मानना है कि इन पार्कों के विकसित होने से पर्यटकों को मंदिरों और घाटों के साथ-साथ काशी की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और शिल्प विरासत को समझने का नया अवसर मिलेगा। वहीं स्थानीय बच्चों और युवाओं को भी संविधान, स्वतंत्रता संग्राम, संत परंपरा और स्थानीय इतिहास की जानकारी रोचक तरीके से प्राप्त होगी।
110 मालियों की होगी नियुक्ति
नगर निगम ने परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है और निर्माण कार्य चरणबद्ध ढंग से कराया जाएगा। पार्कों के रखरखाव के लिए 110 मालियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही नगर निगम अपनी नर्सरी भी विकसित कर रहा है, जहां तैयार किए जाने वाले पौधों से पार्कों की हरियाली और शहर के सौंदर्यीकरण को बढ़ावा मिलेगा।