बीएचयू में पहली बार मेधावियों के सम्मान का भव्य समारोह, 332 विद्यार्थियों को मिला शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार

बीएचयू ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने और उत्कृष्टता की संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में शुक्रवार को नई पहल की। विश्वविद्यालय के स्वातंत्र्य भवन में पहली बार शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न पाठ्यक्रमों की सम-सेमेस्टर परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 332 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्राप्त करने वालों में स्नातक स्तर के 173 और स्नातकोत्तर स्तर के 159 विद्यार्थी शामिल रहे। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से इस पुरस्कार की शुरुआत की है। योजना के तहत प्रत्येक वर्ष करीब 500 विद्यार्थियों को सम्मानित करने का लक्ष्य रखा गया है।
 

कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी बोले-शैक्षणिक उत्कृष्टता विश्वविद्यालय के अस्तित्व का मूल उद्देश्य, हर साल करीब 500 विद्यार्थियों को मिलेगा सम्मान

स्वातंत्र्य भवन में उमड़ा विद्यार्थियों का हुजूम, कला संकाय के सर्वाधिक 92 मेधावी सम्मानित; स्नातक के 173 और स्नातकोत्तर के 159 विद्यार्थियों को मिला पुरस्कार

वाराणसी। बीएचयू ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने और उत्कृष्टता की संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में शुक्रवार को नई पहल की। विश्वविद्यालय के स्वातंत्र्य भवन में पहली बार शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न पाठ्यक्रमों की सम-सेमेस्टर परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 332 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्राप्त करने वालों में स्नातक स्तर के 173 और स्नातकोत्तर स्तर के 159 विद्यार्थी शामिल रहे। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से इस पुरस्कार की शुरुआत की है। योजना के तहत प्रत्येक वर्ष करीब 500 विद्यार्थियों को सम्मानित करने का लक्ष्य रखा गया है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता किसी भी विश्वविद्यालय के अस्तित्व का मूल उद्देश्य है। विद्यार्थियों की उपलब्धियों को पहचान देने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय के वार्षिक कार्यक्रमों में एक विशेष दिन शामिल करने की आवश्यकता महसूस की गई। इसी सोच के साथ शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की मेहनत और प्रतिभा को सम्मान देने के साथ दूसरे विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है।

कुलपति ने कहा कि सम्मानित विद्यार्थियों ने अपने प्रदर्शन से विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। उनकी उपलब्धियों को विश्वविद्यालय परिसर में ही पहचान और सम्मान मिलना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अन्य विद्यार्थियों को भी मेहनत करने और बेहतर परिणाम हासिल करने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक विश्वविद्यालय की वास्तविक नींव हैं। उनके मार्गदर्शन और सहयोग के बिना इस तरह की शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करना संभव नहीं है। उन्होंने शिक्षकों के योगदान के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया।

8.5 या उससे अधिक सीजीपीए हासिल करने वाले विद्यार्थी सम्मानित
विश्वविद्यालय की ओर से शुरू की गई इस पुरस्कार योजना के अंतर्गत स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के विभिन्न विषयों के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया जा रहा है। समारोह में उन्हीं विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए, जिन्होंने अपने-अपने पाठ्यक्रमों में सर्वोच्च स्थान हासिल करने के साथ 8.5 या उससे अधिक संचयी ग्रेड बिंदु औसत (सीजीपीए) प्राप्त किया है।

इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से पहचान देने का प्रयास किया है। पुरस्कारों की संख्या संबंधित पाठ्यक्रम में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार निर्धारित की गई है, ताकि अलग-अलग आकार के पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उचित अवसर मिल सके।

कला संकाय के 92 विद्यार्थी सम्मानित
समारोह में विभिन्न संकायों और संस्थानों के विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। संकायवार आंकड़ों में कला संकाय सबसे आगे रहा। यहां के 92 विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके बाद विज्ञान संकाय के 78 और कृषि संकाय के 30 विद्यार्थी सम्मानित हुए।

कुल 332 पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में 173 विद्यार्थी स्नातक और 159 विद्यार्थी स्नातकोत्तर स्तर के रहे। विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों की भागीदारी ने विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता के व्यापक दायरे को प्रदर्शित किया। पुरस्कार वितरण का उद्देश्य केवल सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वालों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के बीच नियमित अध्ययन, प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन की भावना को बढ़ावा देना भी है।

विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर तय होंगे पुरस्कार
विश्वविद्यालय ने पुरस्कार वितरण के लिए पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या को आधार बनाया है। जिन पाठ्यक्रमों में 100 से अधिक विद्यार्थी हैं, उनमें तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। वहीं, 50 से 100 विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रमों के लिए दो पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। 50 से कम विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रमों में एक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

इस व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न विषयों और पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने का प्रयास किया गया है। विश्वविद्यालय की योजना के अनुसार, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर को मिलाकर हर वर्ष लगभग 500 विद्यार्थियों को यह पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी।

'आज के मेधावियों को चुनौती दें, अपनी मेहनत से बनाएं पहचान'
कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने उन विद्यार्थियों को भी प्रेरित किया, जिन्हें इस बार पुरस्कार नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आज सम्मानित होने वाले साथियों से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, उन्हें चुनौती देनी चाहिए और अपनी मेहनत से बेहतर परिणाम हासिल करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले वर्ष पुरस्कार प्राप्त करने वालों की सूची में नए नाम शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि आज सम्मानित होने वाले कुछ विद्यार्थी भविष्य में देश और दुनिया में विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे। वहीं, कुछ विद्यार्थी आगे चलकर इसी विश्वविद्यालय में लौटकर शिक्षण कार्य से भी जुड़ सकते हैं। कुलपति के इस संदेश ने शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा को सकारात्मक दिशा देने और विद्यार्थियों में दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा पर जोर दिया।

समारोह में विद्यार्थियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। स्वातंत्र्य भवन का सभागार विद्यार्थियों, शिक्षकों, संकायाध्यक्षों, निदेशकों, अधिकारियों और पुरस्कार प्राप्त करने वालों से भरा रहा। जगह कम पड़ने पर पुरस्कार नहीं पाने वाले विद्यार्थी भी पहली मंजिल की बालकनी में एकत्र होकर कार्यक्रम में शामिल हुए। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने शैक्षणिक उपलब्धियों के प्रति उनकी रुचि और सम्मान को प्रदर्शित किया।

दो चरणों में होगा पुरस्कार वितरण
स्वागत संबोधन में छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यह पहल विद्यार्थियों को पढ़ाई में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की योजना के अनुसार हर साल स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों को मिलाकर करीब 500 पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके लिए पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी।

समारोह में कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के साथ कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह और परीक्षा नियंत्रक के अतिरिक्त प्रो. जीपी सिंह ने विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए। कुलसचिव ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के नामों का वाचन किया।

विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा में जुड़ा नया अध्याय
धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए परीक्षा नियंत्रक के अतिरिक्त प्रो. जीपी सिंह ने कहा कि यह अवसर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास में विशेष और अविस्मरणीय रहेगा। सौ वर्षों से अधिक पुरानी गौरवशाली परंपरा वाले विश्वविद्यालय में पहली बार विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रहने के दौरान उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए इस प्रकार सम्मानित किया गया है। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय में उत्कृष्टता की संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. पतंजलि मिश्रा ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय ने वंदे मातरम् की प्रस्तुति दी, जबकि प्रदर्शन कला संकाय के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया। समारोह का संचालन प्रो. पद्मिनी रवींद्रनाथ ने किया।

बीएचयू की इस पहल ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को पहचान देने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का मंच उपलब्ध कराया। विश्वविद्यालय की योजना के अनुसार, प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह पुरस्कार समारोह आने वाले समय में मेधावी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है।