बुद्ध पूर्णिमा पर सारनाथ में उमड़ा आस्था का सैलाब, 12 देशों के अनुयायी पहुंचे, शांति का गूंजा संदेश
वाराणसी। सारनाथ में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर इस बार अभूतपूर्व आस्था का दृश्य देखने को मिल रहा है। विश्व में बढ़ती अशांति के बीच भगवान गौतम बुद्ध की उपदेश स्थली से शांति और सद्भाव का संदेश दिया जा रहा है। 12 देशों और देश के 8 राज्यों से बौद्ध अनुयायी लगातार यहां पहुंच रहे हैं। गुरुवार शाम से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था, जो अब निरंतर जारी है।
मूलगंध कुटी विहार परिसर सहित सारनाथ के विभिन्न बौद्ध मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया है। पंचशील के झंडे चारों ओर लहरा रहे हैं और विद्युत झालरों से पूरा क्षेत्र जगमगा रहा है। बुद्ध पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर यहां धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला चल रही है। सबसे खास आकर्षण भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेषों के दर्शन हैं, जिनके लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
बताया जा रहा है कि इस वर्ष दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के सारनाथ पहुंचने की संभावना है। भगवान बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाएं जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण इसी दिन से जुड़ी मानी जाती हैं, जिसके कारण इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है। देश-विदेश से आए श्रद्धालु अपने-अपने तरीके से पूजा-अर्चना कर रहे हैं और शांति, करुणा व अहिंसा का संदेश ग्रहण कर रहे हैं।
मूलगंध कुटी विहार में महास्थविरों के सान्निध्य में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह से ही श्रद्धालु अस्थि अवशेषों के दर्शन कर रहे हैं। वहीं दोपहर में धर्म सभाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है, जिसमें बौद्ध धर्म के उपदेशों और परंपराओं को प्रस्तुत किया जा रहा है।
शाम के समय अंबेडकर स्मारक स्थल से सारनाथ तक भव्य धम्म यात्रा निकाली जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में अनुयायी शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा शिविर, पेयजल व्यवस्था, सामूहिक भोजन और अन्य सेवाएं भी दिनभर संचालित की जा रही हैं। महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के महासचिव सुमित आनंद थेतेरो ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा का यह आयोजन वैश्विक शांति और मानवता के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आता है। सारनाथ में उमड़ा यह जनसैलाब भगवान बुद्ध के सिद्धांतों के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास को दर्शाता है।