गंगा का जलस्तर बढ़ते ही मोकलपुर-गोबरहां में खेतों की कटान शुरू, किसान चिंतित

चिरईगांव क्षेत्र के गंगासोता में बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ही मोकलपुर-गोबरहां सीमा पर खेतों की कटान शुरू हो गई है। पानी के तेज बहाव से खेती योग्य जमीन गंगासोता में समाती जा रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ के दौरान होने वाली कटान से धीरे-धीरे खेतों का रकबा कम होता जा रहा है और कई किसानों के सामने खेती बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
 

वाराणसी। चिरईगांव क्षेत्र के गंगासोता में बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ही मोकलपुर-गोबरहां सीमा पर खेतों की कटान शुरू हो गई है। पानी के तेज बहाव से खेती योग्य जमीन गंगासोता में समाती जा रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ के दौरान होने वाली कटान से धीरे-धीरे खेतों का रकबा कम होता जा रहा है और कई किसानों के सामने खेती बचाने का संकट खड़ा हो गया है।

किसान रामबाबू, हरेराम, अश्विनी सिंह, इंद्रजीत सिंह और बचाऊ निषाद ने बताया कि कटान की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। हर वर्ष बाढ़ के पानी के साथ खेतों की जमीन कटकर गंगासोता में चली जाती है। उनका कहना है कि कटान रोकने के लिए स्थायी उपाय नहीं होने से खेती पर निर्भर परिवारों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। किसानों ने सरकार से कटान रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम और प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

ग्रामीणों के मुताबिक खेती उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। लगातार भूमि कटान के कारण खेती योग्य जमीन घट रही है, जिससे परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल होता जा रहा है। किसानों का आरोप है कि कटान से होने वाले नुकसान के बावजूद उन्हें अब तक किसी तरह की पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है।

उधर, गंगा और गंगासोता दोनों का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों में भी असर दिखाई देने लगा है। खेतों में बोई गई सब्जियों और हरे चारे की फसलें पानी में डूबने लगी हैं। इससे किसानों के साथ पशुपालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। हरे चारे की फसलें जलमग्न होने से पशुओं के लिए चारे का संकट गहराने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ और कटान की स्थिति पर निगरानी बढ़ाने तथा तत्काल राहत उपाय करने की मांग की है।