काशी द्वार परियोजना का विरोध जताने जा रहे किसान नेता नजरबंद, प्रशासन पर तानाशाही का आरोप
वाराणसी। मिर्जामुराद क्षेत्र में काशी द्वार परियोजना को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिस प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए कई किसान नेताओं और आंदोलनकारियों को नजरबंद कर दिया। यह कार्रवाई लोक समिति आश्रम, नागेपुर में की गई, जिससे आंदोलनकारियों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
काशी द्वार परियोजना के तहत किसानों की जमीन के कथित जबरन अधिग्रहण के विरोध में क्षेत्र के किसान लामबंद हो रहे थे। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों के शामिल होने की सूचना प्रशासन को पहले ही मिल गई थी। एहतियातन पुलिस ने संबंधित नेताओं के घरों पर पहले से ही निगरानी बढ़ा दी थी।
गुरुवार को पुलिस ने सभी प्रमुख आंदोलनकारियों को लोक समिति आश्रम, नागेपुर बुलाया और वहीं उन्हें नजरबंद कर दिया। नजरबंद किए गए नेताओं में लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर, नागेपुर ग्राम प्रधान मुकेश कुमार, गंजारी ग्राम प्रधान अमित कुमार, हरपुर ग्राम प्रधान शिवकुमार राजभर, मनरेगा मजदूर यूनियन के संयोजक सुरेश राठौर तथा मुस्तफा प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने कहा कि यह कदम पूरी तरह से संविधान विरोधी है और इससे स्पष्ट होता है कि प्रशासन किसानों की आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है।
वहीं, आराजी लाइन प्रधान संघ के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि बिना किसानों की सहमति के उनकी जमीन का अधिग्रहण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपनी नीति में बदलाव नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
मनरेगा मजदूर यूनियन के संयोजक सुरेश राठौर ने भी प्रशासन की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है। लेकिन इस तरह नजरबंदी कर लोगों को रोकना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।