दुर्गापूजा पर काशी में आस्था के साथ तकनीकी का संगम, इलेक्ट्रॉनिक दुर्गा प्रतिमाएं बनेंगी आकर्षण
घूमेगा मां का सिर, बदलेंगे हाथों के भाव, नारी सुरक्षा और पौराणिक कथाओं का संदेश देंगी विशेष प्रतिमाएं
15 स्थानों पर होगी दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना, कोलकाता की एकचाला शैली से लेकर ब्रह्मांड की अवधारणा तक दिखेगी विविधता
रक्तबीज वध का दिखेगा इलेक्ट्रॉनिक दृश्य, कोलकाता की एकचाला शैली में भी बन रहीं प्रतिमाएं
रिपोर्ट - ओमकार नाथ
वाराणसी। दुर्गा पूजा की तैयारियों के साथ ही काशी में मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में रौनक बढ़ गई है। कहीं प्रतिमाओं को अंतिम आकार दिया जा रहा है तो कहीं रंग-रोगन और सजावट का काम चल रहा है। इस बार शहर में करीब 15 स्थानों पर भव्य दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी है। खास बात यह है कि कई पूजा पंडालों में परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक और सामाजिक संदेश का संगम देखने को मिलेगा। इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से तैयार प्रतिमाओं में मां दुर्गा के सिर और हाथों की गतिविधियां दिखाई देंगी।
इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से दिखेगा जीवंत स्वरूप
मूर्तिकार अभिजीत विश्वास के अनुसार हर वर्ष प्रतिमाओं में कुछ नया करने का प्रयास किया जाता है। इस बार करीब तीन से चार इलेक्ट्रॉनिक प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें तकनीकी उपकरणों की मदद से मां दुर्गा के हाथों और गर्दन की गतिविधियां दिखाई जाएंगी। प्रतिमा का सिर घूमेगा और चेहरे के भावों में भी बदलाव देखने को मिलेगा। इससे श्रद्धालुओं को प्रतिमा का अलग और गतिशील स्वरूप देखने को मिलेगा।
नारी सुरक्षा पर केंद्रित होगी विशेष प्रतिमा
इस बार एक प्रतिमा के जरिए नारी सुरक्षा और सम्मान का संदेश देने की तैयारी है। इसमें एक लड़की को युवक परेशान करता हुआ दिखाया जाएगा। इसी दौरान विद्यालय की शिक्षिका पहुंचकर युवक का विरोध करती हैं। विरोध के बाद युवक को राक्षस के रूप में दिखाया जाएगा। इसके बाद शिक्षिका मां दुर्गा का स्वरूप धारण करेंगी और उनके दस हाथ प्रकट होंगे। अंत में मां दुर्गा के रूप में शिक्षिका राक्षस का वध करती नजर आएंगी।
मूर्तिकार के मुताबिक इस प्रस्तुति के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए समाज की जिम्मेदारी का संदेश देने का प्रयास किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से दृश्य को प्रभावी बनाने की तैयारी है।
रक्तबीज वध भी होगा आकर्षण
दूसरी विशेष प्रतिमा में पौराणिक कथा के रक्तबीज वध का दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। कथा के अनुसार रक्तबीज के रक्त की बूंदों से उसके अनेक रूप उत्पन्न होते हैं। प्रतिमा में इसी प्रसंग को तकनीकी प्रभावों के साथ दिखाने की तैयारी है। इसके बाद मां दुर्गा के काली स्वरूप में रक्तबीज वध का दृश्य प्रदर्शित किया जाएगा। तीसरी विशेष प्रतिमा में मां दुर्गा को त्रिशूल से राक्षस का वध करते हुए दिखाया जाएगा। इसमें भी इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के जरिए प्रतिमा के विभिन्न अंगों में गतिविधियां प्रदर्शित की जाएंगी।
एकचाला शैली और एलियन स्वरूप भी
इस बार कोलकाता की प्रसिद्ध एकचाला शैली में भी कई प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इस शैली में मां दुर्गा के साथ उनका पूरा परिवार एक ही संरचना में दिखाई देता है। मूर्तिकार ने बताया कि उनके पिता भी प्रसिद्ध मूर्तिकार रहे हैं और उनके कई शिष्य आज काशी में प्रतिमा निर्माण कर रहे हैं। वहीं ब्रह्मांड की अवधारणा पर आधारित एक प्रतिमा भी तैयार की जा रही है। इसमें मां दुर्गा के चेहरे को मानव और एलियन के मिश्रित स्वरूप की कल्पना के अनुरूप बनाया जा रहा है। यह प्रतिमा पूजा पंडाल में श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए कौतूहल का केंद्र बन सकती है। दुर्गा पूजा करीब आने के साथ कार्यशालाओं में प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेज हो गया है। काशी में इस बार परंपरा, पौराणिक कथाओं, आधुनिक तकनीक और सामाजिक संदेश के मेल से तैयार प्रतिमाएं पूजा आयोजनों को नया स्वरूप देने की तैयारी में हैं।