काशी में वासंतिक नवरात्र की अनूठी परंपरा, तीन स्थलों पर स्थापित होंगी मां दुर्गा की प्रतिमाएं, दर्शन को उमड़ेंगे भक्त
वाराणसी। वासंतिक (चैत्र) नवरात्र के अवसर पर एक बार फिर आस्था और परंपरा का विशेष संगम देखने को मिलेगा। काशी के तीन प्रमुख स्थलों आनंदमयी आश्रम, भोला गिरि आश्रम और कालिका गली में दशकों से चली आ रही परंपरा के तहत इस वर्ष भी मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इन स्थलों पर सप्तमी से दशमी तक चार दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा।
शिवाला स्थित आनंदमयी आश्रम में यह परंपरा करीब 82 वर्षों से चली आ रही है, जिसकी शुरुआत आजादी से तीन वर्ष पूर्व हुई थी। वहीं पांडेय हवेली स्थित भोला गिरि आश्रम में सौ वर्षों से अधिक समय से वासंतिक नवरात्र में प्रतिमा स्थापना की परंपरा कायम है। इसके अलावा विश्वनाथ मंदिर के समीप कालिका गली में पिछले 26 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है। इन तीनों स्थानों की परंपराएं काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र हैं।
खोजवां स्थित मूर्ति निर्माण केंद्र में इन प्रतिमाओं को तैयार करने वाले मूर्तिकार अभिजीत विश्वास ने बताया कि इस वर्ष सभी प्रतिमाएं पूरी तरह तैयार कर ली गई हैं। आनंदमयी आश्रम और भोला गिरि आश्रम के लिए पारंपरिक बंगला चाल शैली में प्रतिमाएं बनाई गई हैं, जो बंगाल की पूजा पद्धति को दर्शाती हैं। वहीं कालिका गली की प्रतिमा इस बार विशेष रूप से अजंता-एलोरा की कलात्मक थीम पर आधारित है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिमाओं के श्रृंगार, आभूषण और अधिकांश सजावटी सामग्री मिट्टी से तैयार की गई है, जिससे इनकी पारंपरिक सुंदरता और धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। आयोजकों के अनुसार, चैत्र नवरात्र की सप्तमी तिथि से प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू होगी, जो दशमी तक जारी रहेगी। इस दौरान प्रतिदिन पूजा, आरती के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
विशेष आकर्षण के रूप में आनंदमयी आश्रम में कोलकाता से आए पुरोहितों द्वारा पारंपरिक विधि से पूजा संपन्न कराई जाएगी, साथ ही ढाक वादकों की प्रस्तुति से बंगाल की संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी। चार दिवसीय इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है, जिससे काशी एक बार फिर भक्ति और उत्सव के रंग में रंग जाएगी।