नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की नींव, संस्कृत विश्वविद्यालय से निकली साइकिल यात्रा, 100 सप्ताह तक चलेगा जागरुकता अभियान
वाराणसी। नशामुक्त युवा-विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से गुरुवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से भव्य साइकिल यात्रा निकाली गई। प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय आह्वान के अनुरूप आयोजित ‘नशा मुक्त युवा–विकसित भारत के लिए संकल्प अभियान’ के तहत निकली यात्रा को विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक हेरिटेज भवन के मुख्य द्वार से कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, युवाओं और स्वयंसेवकों ने उत्साह के साथ भाग लिया।
इस दौरान युवाओं ने नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपनी ऊर्जा को शिक्षा, खेल, नवाचार, सेवा तथा राष्ट्र निर्माण में लगाने का संदेश दिया। साइकिल सवारों के हाथों में ‘नशा मुक्त भारत’, ‘युवा जागो, नशा भागो’ और ‘नशा मुक्त भारत-स्वस्थ भारत’ जैसे संदेश लिखी तख्तियां और बैनर रहे।
नशामुक्त युवा विकसित भारत की वास्तविक शक्ति : कुलपति
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शरीर और मन को कमजोर नहीं करता, बल्कि इसका असर परिवार, समाज और राष्ट्र की सामूहिक शक्ति पर भी पड़ता है। स्वस्थ, संस्कारवान, जागरूक और नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की वास्तविक शक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और रचनात्मक क्षमता को सकारात्मक दिशा देकर राष्ट्र के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए जरूरी है कि युवा नशे से दूर रहकर ज्ञान, संस्कार, नवाचार, खेल, सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ें।
कुलपति ने कहा कि नशामुक्ति केवल व्यक्तिगत जीवनशैली का विषय नहीं, बल्कि परिवार की सुख-शांति, समाज के स्वास्थ्य और राष्ट्र की प्रगति से जुड़ा सामाजिक दायित्व है। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और अपने मित्रों व सहपाठियों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नशामुक्ति को युवा चेतना और युवा चेतना को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकता है। युवाओं की सामूहिक जागरूकता और इच्छाशक्ति से भारत को स्वस्थ, संस्कारित और सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।
जेन-जी को सकारात्मक दिशा देने की जरूरत
विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण संकाय प्रमुख एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि युवा देश की रीढ़ हैं और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति उनके सामने गंभीर सामाजिक चुनौती है। उन्होंने कहा कि जेन-जी देश की नई ऊर्जा और परिवर्तन की अग्रदूत पीढ़ी है। उसकी प्रतिभा, तकनीकी दक्षता, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता को नशे से बचाकर शिक्षा, खेल, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगाना जरूरी है।
उन्होंने युवाओं से स्वयं नशामुक्त रहने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि युवा नशामुक्ति को जीवन का संकल्प बनाएं तो इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार और समाज तक पहुंचेगा।
इन मार्गों से गुजरी साइकिल यात्रा
साइकिल यात्रा विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से शुरू होकर लहुराबीर, आजाद पार्क, मैदागिन चौराहा, पटेल धर्मशाला और तेलियाबाग होते हुए पुनः विश्वविद्यालय परिसर की ओर रवाना हुई। मार्ग में युवाओं ने लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया और स्वस्थ एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और युवाओं ने नशे से दूर रहने तथा समाज को भी नशामुक्त बनाने के लिए जागरूक करने का संकल्प लिया। अभियान से युवाओं को डिजिटल माध्यम से भी जोड़ा गया। प्रतिभागियों ने ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान के तहत ऑनलाइन पंजीकरण कराया और डिजिटल प्रमाण-पत्र प्राप्त किए।
100 सप्ताह चलेगा जागरुकता अभियान
आयोजकों के अनुसार साइकिल यात्रा व्यापक एवं दीर्घकालिक जनजागरूकता अभियान की शुरुआत है। 100 सप्ताह तक चलने वाले अभियान के दौरान युवाओं और समाज को नशे से दूर रखने के लिए खेलकूद प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगोष्ठियां और अन्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. राजनाथ, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. विजेन्द्र कुमार, डॉ. नितिन कुमार, डॉ. दुर्गेश पाठक सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।