बीएचयू में डॉ. नीरजा माधव की पुस्तक ‘Riding the Tiger’ का भव्य लोकार्पण, शोधार्थियों के जीवन को समर्पित संवेदनशील दस्तावेज
वाराणसी। बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में मंगलवार को प्रसिद्ध साहित्यकार और लेखिका डॉ. नीरजा माधव की नवीनतम पुस्तक “Riding the Tiger: शोध छात्र की डायरी” का शानदार लोकार्पण किया गया। यह विशेष आयोजन माधव फाउंडेशन एवं मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जबकि पुस्तक का प्रकाशन प्रतिष्ठित प्रलेक प्रकाशन ने किया है। कार्यक्रम में अकादमिक जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों और बड़ी संख्या में शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ के कुलपति प्रो. वांग्चुक दोर्जे नेगी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. हरिकेश सिंह, पूर्व कुलपति, जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, बिहार उपस्थित रहे। इस अवसर पर साहित्यकार एवं समीक्षक प्रो. इन्दीवर ने कार्यक्रम का बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने शोध छात्र जीवन की व्यावहारिकताओं और इस पुस्तक की महत्ता पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। इसके बाद बीएचयू के संगीत और मंच कला विभाग की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत कुलगीत ने पूरे सभागार में एक सौम्य और प्रेरक वातावरण निर्मित किया।
पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुए प्रकाशक जितेंद्र पात्रो ने कहा कि Riding the Tiger शोधार्थियों के अनुभवों और मानसिक यात्राओं को अभिव्यक्त करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण कृति है। इसमें शोध छात्र जीवन की चुनौतियों मनोवैज्ञानिक दबाव, सामाजिक परिस्थितियां, अकादमिक प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक अपेक्षाएं और आत्म-संघर्ष को बेहद संवेदनशीलता और सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने बताया कि डॉ. नीरजा माधव ने न सिर्फ शोधार्थियों की कठिनाइयों को रेखांकित किया है, बल्कि उनके आत्म-अन्वेषण की प्रक्रिया को भी प्रभावी ढंग से उजागर किया है, जिससे यह पुस्तक शोध में लगे युवाओं के लिए एक प्रेरक साथी बन जाती है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बेनी माधव, पूर्व प्राचार्य, ने किया। बीएचयू परिसर सहित आसपास के विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। अंत में सभी अतिथियों ने लेखिका को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी और शोध यात्रा के वास्तविक पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।