करघे के ताने-बाने को मजबूत कर रही डबल इंजन की सरकार
इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड हैंडलूम विकसित कर बुनकरों के अनुकूल व अत्याधुनिक बनाया जा रहा
‘रूरल टेक्नोलॉजी एक्शन ग्रुप के माध्यम से आईआईटी विकसित कर रहा करघे का तकनीकी समाधान
आईआईटी रुड़की ने बुनकरों की जमीनी समस्याओं की पहचान की
आईआईटी मद्रास ने समस्याओं के समाधान हेतु इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड हैंडलूम तकनीकी विकसित की
डिजाइन में तेजी से बदलाव, सेंसर के माध्यम से धागों के चयन में आसानी, जटिल डिजाइनों को साड़ी पर उतारना होगा आसान
बुजुर्ग बुनकरों और गठिया तथा शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे कारीगरों के लिए बटन-संचालित मशीन होगी लाभकारी
कांचीपुरम में 6 बुनकरों को ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में किया गया तैयार, बनारस के बुनकरों को देंगे इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड हैंडलूम का प्रशिक्षण
दो इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड हैंडलूम मशीन वाराणसी में पायलट प्रोजेक्ट के रूप जल्द होंगी स्थापित
वाराणसी। काशी के बुनकरों का कौशल, 'बनारसी साड़ी' की बुनकरी में साफ़ झलकता है। रेशम के धागों से बनी बनारसी साड़ियां न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं, यह शिल्प एक ओर समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, तो वहीं हजारों लोगों के आजीविका का साधन भी है। बनारसी साड़ी की अंतरराष्ट्रीय पहचान कायम रखने और बनारस की विरासत हथकरघा (बनारसी साड़ी उद्योग) को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत रखने के लिए डबल इंजन की सरकार करघे के ताने-बाने को मजबूत करते हुए इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड हैंडलूम तकनीकी विकसित कर बुनकरों के अनुकूल और अत्याधुनिक बना रही है। ऐसी ही 2 इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड हैंडलूम मशीन वाराणसी में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जल्द स्थापित होने वाली हैं।
सरकार बुनकरों की बेहतरी और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए बहुस्तरीय पहल कर रही है। जीआई पंजीकृत तथा ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत बनारसी साड़ी को जिले के प्रमुख उत्पाद के रूप में चिह्नित कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग द्वारा क्लस्टर विकास के लिए वित्तीय सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) कार्यालय के अंतर्गत संचालित ‘रूरल टेक्नोलॉजी एक्शन ग्रुप (RuTAG)’ पहल के माध्यम से आईआईटी संस्थानों को तकनीकी समाधान विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके लिए आईआईटी रुड़की द्वारा वाराणसी क्लस्टर का सर्वेक्षण कर बुनकरों की जमीनी समस्याओं की पहचान की गई, जबकि आईआईटी मद्रास द्वारा इन समस्याओं के समाधान हेतु इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड हैंडलूम तकनीक विकसित की गई है। यह तकनीक पारंपरिक करघों के अनुरूप तैयार की गई है, जिससे बुनाई प्रक्रिया सरल,तेज और सटीक होगी।
जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ‘कार्ड-कटिंग’ प्रक्रिया की जरुरत नहीं पड़ती, जिससे डिज़ाइन में तेजी से बदलाव संभव होता है और समय व लागत दोनों में बचत होती है। सेंसर एवं रंग-संकेत प्रणाली के माध्यम से धागों के चयन में मानवीय त्रुटि कम होती है, जिससे जटिल डिजाइनों में भी गुणवत्ता और स्थिरता बनी रहती है।
उपायुक्त ने बताया कि यह मशीन बटन-संचालित होने के कारण बुनकरों को कठिन शारीरिक श्रम की जरुरत नहीं पड़ेगा। यह विशेष रूप से बुजुर्ग बुनकरों या गठिया जैसी जोड़ों की समस्याओं तथा शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे कारीगरों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। इसके अतिरिक्त, इसे स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपयोग के अनुकूल बनाया जा रहा है, जिससे बुनकर इसे आसानी से अपनाकर अपनी पारंपरिक दक्षता के साथ कार्य कर सकें। क्लस्टर क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की समस्या को देखते हुए इस प्रणाली में यूपीएस एवं सौर ऊर्जा आधारित बैकअप की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिससे उत्पादन में निरंतरता बनी रहे।
ओडीओपी कंसल्टेंट दीपेश विश्वकर्मा ने जानकारी देते हुआ बताया कि इस तकनीकी के पायलट कार्यान्वयन के रूप में वाराणसी में 2 इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड हैंडलूम मशीनों की स्थापना प्रस्तावित हैं। इनमें से एक मशीन वीवर्स सर्विस सेंटर, चौकाघाट में स्थापित की जाएगी, जबकि दूसरी मशीन क्लस्टर से जुड़े हितधारक के यहां स्थापित की जाएगी। प्रशिक्षण प्राप्त 6 कारीगरों को ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जो अन्य बुनकरों को इस तकनीकी का प्रशिक्षण देंगे।
कांचीपुरम में इस जकार्ट मशीन पर 6 दिनों की ट्रेनिंग पाए हुए मास्टर ट्रेनर और संत कबीर राज्य पुरस्कार से सम्मनित बुनकर गौरव मौर्या ने बताया कि बुनकरों के हित के लिए सरकार की ये पहल बहुत सराहनी है, इस इलेक्ट्रॉनिक जकार्ट को बुनकरों की सुविधा के अनकूल डिजाइन किया गया है। इससे बाजार की चुनौतयों का सामने करते हुए उत्पादन बढ़ेगा।