भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी से समाजवादी युवजन सभा कार्यकर्ताओं में आक्रोश, काशी विद्यापीठ में धीरेंद्र शास्त्री का पुतला फूंककर जताया विरोध

भगवान श्रीकृष्ण को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में मंगलवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर में समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय सचिव राज सिंह यादव के नेतृत्व में छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर व कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने टिप्पणी को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई।
 

वाराणसी। भगवान श्रीकृष्ण को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में मंगलवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर में समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय सचिव राज सिंह यादव के नेतृत्व में छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर व कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने टिप्पणी को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई।

छात्र नेताओं का आरोप था कि विगत दिनों एक कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई कथित टिप्पणी से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। उनका कहना था कि भारत जैसे बहुधार्मिक और विविधतापूर्ण देश में किसी भी धर्म, आस्था या आराध्य के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना उचित नहीं है। इस तरह के बयानों से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ने की आशंका रहती है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय सचिव राज सिंह यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा के केंद्र हैं। धार्मिक मंचों से ऐसी टिप्पणी नहीं होनी चाहिए, जिससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

राज सिंह यादव ने सरकार से धीरेंद्र शास्त्री की गिरफ्तारी की मांग भी उठाई। साथ ही ऐसी कथाओं और आयोजनों पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग पर गंभीरता से विचार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना, प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देना है। धार्मिक आयोजनों का उपयोग समाज में विभाजन या नफरत फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। किसी भी धर्म के आराध्य के प्रति टिप्पणी करते समय मर्यादा और संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धार्मिक सद्भाव, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को बनाए रखने की अपील की। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र एवं समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ता मौजूद रहे।