धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर वाराणसी के विश्वविद्यालयों में छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रिया, कहीं जश्न तो कहीं निष्पक्ष जांच की मांग
वाराणसी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद वाराणसी के प्रमुख विश्वविद्यालयों में छात्रों के बीच अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक ओर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रों ने इसे छात्र आंदोलन की जीत बताते हुए जश्न मनाया, वहीं काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग उठाई।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर में बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए और एक-दूसरे को मेलोडी चॉकलेट व मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते हुए छात्रों ने इसे लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन की ऐतिहासिक जीत बताया। छात्रों का कहना था कि सरकार का रवैया लंबे समय से छात्रों के प्रति तानाशाहीपूर्ण रहा है और लगातार चले आंदोलन के दबाव में सरकार को छात्रों की आवाज़ सुननी पड़ी।
इस दौरान छात्र नेता आयुष यादव ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार मनमानी नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो भविष्य में उसे और बड़े राजनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। परिसर में छात्रों ने नारेबाजी करते हुए अपनी खुशी व्यक्त की।
उधर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रों ने इस घटनाक्रम को शिक्षा व्यवस्था के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा। बीएचयू के छात्र अभिषेक सिंह ने कहा कि यदि छात्रों की चिंताओं और शिक्षा व्यवस्था की कमियों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, तो इसे सकारात्मक पहल माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में देशभर में छात्रों और युवाओं ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद की थी और सरकार द्वारा उनकी भावनाओं को गंभीरता से लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
अभिषेक सिंह ने छात्रों से अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से रखने की अपील करते हुए कहा कि अनुशासित आंदोलन अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने संबंधित विभागों से शिक्षा व्यवस्था में हुई किसी भी लापरवाही या अनियमितता की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई करने की मांग की। दोनों विश्वविद्यालयों के छात्रों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम से सरकार, प्रशासन और शिक्षा विभाग को सबक लेते हुए ऐसी पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी भी विद्यार्थी को अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सड़क पर उतरने की आवश्यकता न पड़े।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सीजेपी के 36 दिन तक चले आंदोलन के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया। NEET पेपर लीक मामले में सीजेपी उनके इस्तीफे की मांग कर रही थी। इसी क्रम में वाराणसी के हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज के गेट पर समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर, मिठाई बांटकर और लोगों को मैलोडी टॉफ़ी खिलाकर जश्न मनाया और जमकर डांस किया।