शारदीय नवरात्र में अष्टमी पर मां अन्नपूर्णा के दरबार में उमड़े श्रद्धालु, लाल चुनरी, गुड़हल के फूल और नारियल चढ़ाकर भक्तों ने मांगी सुख-समृद्धि

शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर धर्मनगरी काशी में मां अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कलिका गली स्थित प्राचीन मां अन्नपूर्णा मंदिर में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालु मां के भव्य स्वरूप का दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सुरक्षा की कामना कर रहे हैं। मंदिर परिसर मां के जयकारों और पूजा-अर्चना से भक्तिमय बना हुआ है।
 

कलिका गली स्थित प्राचीन मंदिर में सुबह से दर्शन-पूजन का क्रम जारी, जयकारों से भक्तिमय हुआ परिसर

वाराणसी। शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर धर्मनगरी काशी में मां अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कलिका गली स्थित प्राचीन मां अन्नपूर्णा मंदिर में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालु मां के भव्य स्वरूप का दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सुरक्षा की कामना कर रहे हैं। मंदिर परिसर मां के जयकारों और पूजा-अर्चना से भक्तिमय बना हुआ है।

मां के दरबार में भक्त लाल चुनरी, लाल अड़हुल यानी गुड़हल के फूलों की माला, मिष्ठान और नारियल अर्पित कर रहे हैं। श्रद्धालु मां के चरणों में शीश नवाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना कर रहे हैं। नवरात्र की अष्टमी पर मंदिर में पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना का क्रम जारी है।

अन्न और समृद्धि की देवी हैं मां अन्नपूर्णा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा को अन्न, धन और समृद्धि की देवी माना जाता है। भक्त उनकी आराधना कर परिवार में सुख-शांति, खुशहाली और जीवन में समृद्धि की कामना करते हैं। कलिका गली स्थित यह प्राचीन मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। नवरात्र के दौरान यहां दर्शन-पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। काशी के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु मां का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं।


पुजारी के अनुसार, शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर मां अन्नपूर्णा के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व है। भक्त मां को लाल चुनरी, गुड़हल के फूल, मिष्ठान और नारियल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मां अन्नपूर्णा की कृपा से घर-परिवार में अन्न-धन की उपलब्धता और खुशहाली बनी रहे, इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु उनके दरबार में पहुंचते हैं।