क्रीं-कुण्ड में लोलार्क छठ पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के दर्शन को लगी कतार
अघोरपीठ में घंटा-डमरू और शंखनाद के बीच मना बाबा कीनाराम का छठी समारोह, महिला मंडल ने लगाया रक्तदान शिविर
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने समाधियों का किया दर्शन-पूजन, परिसर के बाहर सजा विशाल मेला; सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
वाराणसी। अघोर परंपरा के विश्वविख्यात सिद्धपीठ बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड में गुरुवार को लोलार्क षष्ठी (लोलार्क छठ) श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। अघोराचार्य बाबा कीनाराम के छठी समारोह के रूप में आयोजित पर्व में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। सुबह से ही आश्रम में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की कतार लगी रही। घंटा-डमरू, शंखनाद और हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
सुबह नौ बजे बाबा के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
पर्व के अवसर पर सुबह आश्रम परिसर की साफ-सफाई और दैनिक आरती के बाद दर्शन-पूजन की तैयारियां शुरू हुईं। श्रद्धालु बाबा कीनाराम, अघोरेश्वर महाप्रभु बाबा भगवान राम और परिसर में स्थित विभिन्न समाधियों के दर्शन के लिए जुटने लगे।
सुबह करीब नौ बजे वर्तमान पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम अपने कक्ष से बाहर आए तो घंटा-डमरू और शंखनाद के बीच श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। इसके बाद औपचारिक पूजा-अर्चना संपन्न हुई। बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के औघड़ तख्त पर विराजमान होने के बाद भक्तों ने कतारबद्ध होकर दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने आश्रम में मौजूद विभिन्न समाधियों का दर्शन-पूजन कर प्रसाद ग्रहण किया। भारी भीड़ के बावजूद दर्शनार्थियों ने अनुशासन बनाए रखा।
बाबा कीनाराम की छठी के रूप में मनाते हैं पर्व
अघोर परंपरा में लोलार्क छठ का विशेष धार्मिक महत्व है। आश्रम में यह पर्व बाबा कीनाराम के जन्म के छठवें दिन मनाए जाने वाले छठी समारोह के रूप में सदियों से आयोजित होता आ रहा है। इस अवसर पर देश-दुनिया के अघोर साधक, संत-महात्मा और अनुयायी जुटते हैं।
आश्रम से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु बाबा सिद्धार्थ गौतम राम को बाबा कीनाराम का पुनरागमित स्वरूप मानते हैं। इसी आस्था के साथ भक्त उनके दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
रक्तदान शिविर लगाकर दिया सेवा का संदेश
पर्व के अवसर पर सामाजिक संस्थान अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान की महिला मंडल की ओर से रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। इसमें कई लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर सामाजिक सेवा में सहभागिता की।
आश्रम के बाहर सजा विशाल मेला
आश्रम परिसर के बाहर मेले जैसा दृश्य रहा। सैकड़ों दुकानों पर खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने दो दिन पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्रम प्रबंधन के साथ समन्वय बनाकर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था संभाली। पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के बीच पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।