सावन में शिवमय होगी काशी, अमेरिका से नेपाल तक से आएंगे श्रद्धालु; महारुद्राभिषेक और वैदिक अनुष्ठानों की तैयारियां तेज

देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी एक बार फिर सावन मास में पूरी तरह शिवमय होने जा रही है। 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहे पवित्र श्रावण मास को लेकर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम सहित शहर के प्रमुख शिवालयों में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस वर्ष भी देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, सिंगापुर, दुबई, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल से बड़ी संख्या में शिवभक्त काशी पहुंचेंगे। श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महारुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप और अन्य वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
 

30 जुलाई से शुरू होगा श्रावण मास, देश-विदेश से उमड़ेगी आस्था, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम सहित प्रमुख शिवालयों में तैयारियां अंतिम चरण में

जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महारुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप और अनुष्ठानों से गूंजेगी शिवनगरी, विदेशी श्रद्धालुओं के आगमन से बढ़ेगा आध्यात्मिक उत्साह

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम सहित प्रमुख शिवालयों में होंगे जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महारुद्राभिषेक

मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल सहित कई राज्यों से बुलाए जा रहे वैदिक ब्राह्मण

सावन भर होंगे शिव महापुराण, श्रीमद्भागवत कथा, भजन-कीर्तन और सत्संग

मारवाड़ी समाज की ओर से अगस्त से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

नमक-चमक, सप्तचंडी यज्ञ, रुद्रचंडी और महामृत्युंजय जप रहेंगे विशेष आकर्षण

प्रत्येक सोमवार को व्रत, कांवड़ यात्रा और घर-घर "ॐ नमः शिवाय" मंत्र जाप से गूंजेगी शिवनगरी

वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी एक बार फिर सावन मास में पूरी तरह शिवमय होने जा रही है। 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहे पवित्र श्रावण मास को लेकर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम सहित शहर के प्रमुख शिवालयों में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस वर्ष भी देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, सिंगापुर, दुबई, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल से बड़ी संख्या में शिवभक्त काशी पहुंचेंगे। श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महारुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप और अन्य वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

सावन को लेकर पूरे शहर में धार्मिक उत्साह चरम पर है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर, महामृत्युंजय महादेव, मार्कंडेय महादेव, गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, शूलटंकेश्वर, रामेश्वर महादेव और ओंकारेश्वर सहित प्रमुख शिवालयों में पूरे माह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

विदेशों से पहुंचेंगे शिवभक्त, महारुद्राभिषेक में होंगे शामिल
आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार इस वर्ष अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल से पांच-पांच परिवार विशेष रूप से काशी पहुंच रहे हैं। ये श्रद्धालु श्रीकाशी विश्वनाथ सहित अन्य प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक, महारुद्राभिषेक और विशेष वैदिक अनुष्ठान कराएंगे। साथ ही शिव महापुराण और अन्य धार्मिक कथाओं का श्रवण भी करेंगे। उन्होंने बताया कि काशी की वैदिक परंपरा और धार्मिक अनुष्ठानों के प्रति विदेशों में भी लगातार आकर्षण बढ़ रहा है, जिसके कारण हर वर्ष विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है।

कई राज्यों से बुलाए जा रहे वैदिक ब्राह्मण
श्रावण मास में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराने के लिए पूर्वांचल के अलावा मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, अयोध्या, वृंदावन, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली और बलिया से वैदिक ब्राह्मणों को आमंत्रित किया गया है। वहीं काशी के विद्वान ब्राह्मण भी अमरकंटक, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में जाकर विशेष अनुष्ठान संपन्न कराएंगे।

शिवालयों में तैयारियां अंतिम चरण में
सावन को देखते हुए प्रमुख शिव मंदिरों में बैरिकेडिंग, दर्शन और जलाभिषेक की अलग-अलग व्यवस्थाएं की जा रही हैं। रुद्राभिषेक और पूजन-अर्चन के लिए पूजन सामग्री की बुकिंग शुरू हो चुकी है। श्रद्धालु और यजमान वैदिक ब्राह्मणों से संपर्क कर अनुष्ठानों की तिथियां तय कर रहे हैं।

पूरे माह गूंजेगी शिव महिमा
श्रावण मास के दौरान काशी में केवल जलाभिषेक ही नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजनों की भी श्रृंखला चलेगी। विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा श्रीशिव महापुराण, श्रीमद्भागवत, श्रीविष्णु पुराण और रामचरितमानस कथा का आयोजन किया जाएगा। मारवाड़ी समाज की ओर से 17 अगस्त से सप्ताहभर चलने वाली श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होगा, जिसमें प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ श्रीकांत बालव्यास प्रवचन देंगे। इसके अतिरिक्त अनेक स्थानों पर भजन-कीर्तन, सत्संग और सामूहिक रुद्राभिषेक का आयोजन भी होगा।

नमक-चमक अनुष्ठान रहेगा विशेष आकर्षण
सावन में रुद्राभिषेक, महारुद्र, सप्तचंडी यज्ञ, रुद्रचंडी अनुष्ठान और महामृत्युंजय महामंत्र के विशेष जप कराए जाएंगे। विशेष रूप से नमक-चमक अनुष्ठान का आयोजन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार रुद्राष्टाध्यायी के नमकम् और चमकम् के वैदिक पाठ से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मकता का संचार होता है।

घर-घर होगी भगवान शिव की आराधना
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगे। कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करेंगे, जबकि अनेक परिवार अपने घरों में "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप, लेखन और रुद्रपाठ कर भगवान शिव की आराधना करेंगे। श्रावण मास के दौरान काशी की गलियां, घाट, मंदिर और आश्रम शिवभक्ति से सराबोर दिखाई देंगे। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था, वैदिक परंपराओं की जीवंतता और धार्मिक आयोजनों की भव्यता एक बार फिर काशी को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करती नजर आएगी।