नीट पेपर लीक के विरोध में धरनारत युवाओं पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से अधिवक्ताओं में आक्रोश, डीएम ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा
वाराणसी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में बुधवार को वाराणसी में अधिवक्ताओं ने जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया और छात्रों पर की गई पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। अधिवक्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफा देने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है। उनका आरोप था कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई उनकी आवाज़ को दबाने का प्रयास है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकार को छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से करना चाहिए, न कि बल प्रयोग के जरिए।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना था कि शिक्षा से जुड़े मामलों में छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को इस पूरे प्रकरण पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए। धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों की भी आलोचना की और कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन को देखते हुए जिलाधिकारी कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई। हालांकि, पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपने की भी बात कही।