चंद्रग्रहण के सूतक काल में संकटमोचन मंदिर में दर्शन-पूजन बंद, सायंकाल 7 बजे खुलेंगे कपाट

फाल्गुन शुक्ल पक्ष मंगलवार को पड़ रहे खण्डग्रास चन्द्रग्रहण के चलते काशी के मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। श्री संकटमोचन मंदिर के कपाट भी सूतक काल में बंद कर दिए गए हैं। मोक्ष के बाद सायंकाल 7 बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे और श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर सकते हैं। 
 

वाराणसी। फाल्गुन शुक्ल पक्ष मंगलवार को पड़ रहे खण्डग्रास चन्द्रग्रहण के चलते काशी के मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। श्री संकटमोचन मंदिर के कपाट भी सूतक काल में बंद कर दिए गए हैं। मोक्ष के बाद सायंकाल 7 बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे और श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर सकते हैं। 

मंदिर प्रशासन के अनुसार 3 मार्च को प्रातः 9 बजे मंदिर का पट बंद कर दिया गया। ग्रहण काल के दौरान श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। चन्द्रग्रहण के मोक्ष काल के उपरांत सायं 7 बजे मंदिर का पट पुनः श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिया जाएगा।

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ग्रहण समाप्ति के बाद विधिवत शुद्धिकरण की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। इसके पश्चात सायं कालीन आरती एवं रात्रि का शयन पूजन नियमानुसार आयोजित होगा। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय का पालन करें तथा अनावश्यक भीड़ से बचें।

धर्मशास्त्रों के अनुसार चन्द्रग्रहण का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। ग्रहण काल में पूजा-अर्चना, मंत्रजप और साधना का विशेष फल बताया गया है, वहीं मंदिरों में पट बंद रखने की परंपरा भी प्राचीन काल से चली आ रही है। काशी के प्रमुख मंदिरों में भी इसी परंपरा का पालन किया जाएगा।