कफ सिरप कांड: 40 हजार पन्नों की चार्जशीट से अरबों के सिंडिकेट का खुलासा, साक्ष्य, गवाहों के बयान और वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्योरा 

कफ सिरप के अवैध कारोबार में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले की मजबूत पैरवी की दिशा में अहम कदम उठाया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी शुभम जयसवाल और उसके पिता भोला जयसवाल समेत सभी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ करीब 40 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में साक्ष्यों, गवाहों के बयान और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत ब्यौरा शामिल है।
 

वाराणसी। कफ सिरप के अवैध कारोबार में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले की मजबूत पैरवी की दिशा में अहम कदम उठाया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी शुभम जयसवाल और उसके पिता भोला जयसवाल समेत सभी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ करीब 40 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में साक्ष्यों, गवाहों के बयान और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत ब्यौरा शामिल है।

जांच में सामने आया है कि वाराणसी में संचालित यह अवैध नेटवर्क हजारों करोड़ रुपये के कारोबार से जुड़ा हुआ है। अब तक इस मामले में 30 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट का सरगना शुभम जयसवाल है, जिसने सुनियोजित तरीके से एक बड़ा गिरोह खड़ा किया था।

जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि आरोपियों ने अलग-अलग नामों से दर्जनों फर्जी फार्मा कंपनियों के लाइसेंस प्राप्त किए थे। इन कंपनियों का उपयोग वास्तविक दवा निर्माण के बजाय केवल बिलिंग और कागजी लेन-देन के लिए किया जाता था। इसके माध्यम से अवैध तरीके से कोडिन कफ सिरप की सप्लाई कर भारी मुनाफा कमाया गया।

चार्जशीट में शुभम और भोला जयसवाल से संबंधित लगभग 60 पन्नों का विशेष विवरण भी शामिल है, जिसमें उनके नेटवर्क, बैंक खातों, संपत्तियों और संदिग्ध लेन-देन का विस्तृत उल्लेख किया गया है। पुलिस ने इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड और कई अहम दस्तावेज भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।

मामले में वैभव बांगर (एडीसीपी) ने बताया कि जांच बेहद गहन और तकनीकी आधार पर की गई है, जिससे आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया गया है। वहीं, मुख्य आरोपी शुभम जयसवाल को कोर्ट द्वारा भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। पुलिस अब उसके साथ जुड़े रिश्तेदारों और सहयोगियों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है, ताकि अवैध धन के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।