पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा विवाद, मंत्री रविंद्र जायसवाल ने लगाए 'वोट जिहाद' के गंभीर आरोप, डीएम ने दिये जांच के आदेश
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मतदाता सूची को लेकर एक बड़ा सियासी विवाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और उत्तरी विधानसभा से विधायक रविंद्र जायसवाल ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए इसे “वोट जिहाद” करार दिया है। मंत्री का दावा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ऐसे हजारों मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही व्यक्ति का नाम दो या उससे अधिक बार मतदाता सूची में दर्ज पाया गया है। इस मामले को लेकर उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी से औपचारिक शिकायत की है।
विशेष पुनरीक्षण में सामने आईं कथित अनियमितताएं
मंत्री रविंद्र जायसवाल के अनुसार, SIR प्रक्रिया में 9 हजार से अधिक ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनका एक से अधिक मतदान केंद्रों पर पंजीकरण पाया गया है। उनका आरोप है कि इनमें एक विशेष समुदाय के लोगों के नाम चिह्नित किए गए हैं। मंत्री का कहना है कि यह मामला केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रयास की ओर इशारा करता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
विपक्ष पर लगाए आरोप, जांच की मांग
मंत्री ने इस पूरे प्रकरण के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ी लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की अनियमितताएं सामने आना चिंताजनक है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इसी के तहत उन्होंने जिला निर्वाचन कार्यालय में विस्तृत रिपोर्ट सौंपते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने दिए जांच के आदेश
मंत्री की शिकायत मिलने के बाद डीएम सत्येंद्र कुमार, जो कि जिला निर्वाचन अधिकारी भी हैं, ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर सभी तथ्यों की गहनता से जांच कराई जाएगी और जांच पूरी होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
एक व्यक्ति, कई बूथ—आरोपों का केंद्र
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ मतदाताओं के नाम एक ही विधानसभा क्षेत्र के भीतर कई बूथों पर दर्ज पाए गए हैं। मंत्री का कहना है कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह चुनावी व्यवस्था में बड़ी चूक मानी जाएगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
फिलहाल जिला निर्वाचन कार्यालय, वाराणसी द्वारा शुरू की गई जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मतदाता सूची में पाई गई विसंगतियां प्रशासनिक भूल हैं या किसी संगठित प्रयास का नतीजा। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है और अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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