शीतलाघाट क्षेत्र के प्राचीन शिव मंदिर पर पाकिस्तानेश्वर महादेव का बोर्ड लगाए जाने से विवाद, पूर्व पार्षद ने जताई आपत्ति, जांच की मांग की
वाराणसी। राजमंदिर स्थित शीतलाघाट क्षेत्र के एक प्राचीन शिव मंदिर पर कथित तौर पर ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम का बोर्ड लगाए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। पूर्व पार्षद घनश्याम सिंह ने कोतवाली थाना प्रभारी को प्रार्थनापत्र देकर मामले की जांच कराने और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मंदिर को सार्वजनिक बताते हुए बोर्ड लगाए जाने के आधार और नामकरण की जांच कराने का अनुरोध किया है।
पूर्व पार्षद की ओर से दिए गए प्रार्थनापत्र के अनुसार, शीतलाघाट के राजमंदिर क्षेत्र में अखाड़ा बूंदी स्टेट परिसर के एक हिस्से में कई दशक पहले सार्वजनिक शिव मंदिर की स्थापना हुई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि तत्कालीन समाजसेवी स्वर्गीय गोपाल लाल कूल के प्रयास से बोगड़ा परिवार के एक सदस्य से मंदिर के लिए स्थान उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की ओर से यहां पूजा-अर्चना की जाती रही है।
बोर्ड लगाए जाने के बाद बढ़ी चर्चा
शिकायतकर्ता के मुताबिक, कुछ दिनों पहले करीब 15 से 20 लोगों के समूह की ओर से मंदिर पर ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम का फ्लेक्स बोर्ड लगाया गया। बोर्ड लगने के बाद मंदिर के नाम को लेकर क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई। प्रार्थनापत्र में अजय शर्मा पुत्र स्वर्गीय रमेश शर्मा और अशी शर्मा पुत्र संजय शर्मा, निवासी राजमंदिर समेत कुछ लोगों पर बोर्ड लगाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में मंदिर परिसर में डमरू रखे जाने का भी उल्लेख किया गया है। पूर्व पार्षद का आरोप है कि बोर्ड हटाने का आग्रह करने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने पुलिस से मामले में हस्तक्षेप कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराने की मांग की है।
मंदिर खोलने की भी मांग
प्रार्थनापत्र में कथित तालाबंदी समाप्त कर मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए पहले की तरह खोलने का अनुरोध भी किया गया है। शिकायतकर्ता ने मंदिर के नामकरण, बोर्ड लगाए जाने और तालाबंदी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की मांग की है। पूर्व पार्षद ने थाना प्रभारी को दिए प्रार्थनापत्र की प्रति पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी को भी भेजी है। शिकायत के साथ कथित बोर्ड की तस्वीर और कुछ स्थानीय नागरिकों के नाम संलग्न किए जाने की बात कही गई है।
फिलहाल बोर्ड लगाए जाने और मंदिर को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बोर्ड कब और किसके द्वारा लगाया गया, नामकरण का आधार क्या है और मंदिर में तालाबंदी की वास्तविक स्थिति क्या है। पुलिस से जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।