रियल एस्टेट निवेश से पहले जांच जरूरी, यूपी रेरा के संवाद कार्यक्रम में उपभोक्ताओं को दी गई सुरक्षित निवेश की सीख

रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) की ओर से सर्किट हाउस में ‘संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गृह खरीदारों, आवंटियों, प्रमोटरों, रियल एस्टेट एजेंटों, आर्किटेक्ट्स समेत विभिन्न हितधारकों को सुरक्षित संपत्ति निवेश और रेरा अधिनियम-2016 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई।
 

वाराणसी। रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) की ओर से सर्किट हाउस में ‘संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गृह खरीदारों, आवंटियों, प्रमोटरों, रियल एस्टेट एजेंटों, आर्किटेक्ट्स समेत विभिन्न हितधारकों को सुरक्षित संपत्ति निवेश और रेरा अधिनियम-2016 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। इस दौरान मंडलायुक्त एवं वाराणसी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एस. राजालिंगम, वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा, अपर सचिव डॉ. गुडाकेश शर्मा, नगर नियोजक प्रभात कुमार समेत प्राधिकरण के अधिकारी और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।

यूपी रेरा अध्यक्ष ने कहा कि जागरूक उपभोक्ता ही सुरक्षित रियल एस्टेट निवेश की सबसे बड़ी गारंटी है। उन्होंने संपत्ति खरीदने से पहले यूपी रेरा पोर्टल पर संबंधित परियोजना का पंजीकरण, स्वीकृत लेआउट, निर्माण की प्रगति, परियोजना पूरी होने की निर्धारित अवधि और प्रमोटर व रियल एस्टेट एजेंट के पंजीकरण समेत जरूरी जानकारियों का सत्यापन करने की सलाह दी।

यूपी रेरा के प्रधान सलाहकार अबरार अहमद ने रेरा अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, उपभोक्ताओं के अधिकारों और शिकायत निवारण प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े भुगतान यथासंभव ऑनलाइन माध्यम से किए जाने चाहिए। साथ ही Agreement for Sale के पंजीकरण से पहले कुल संपत्ति मूल्य का 10 प्रतिशत से अधिक भुगतान नहीं करने की सलाह दी गई।

कार्यक्रम में बताया गया कि यदि किसी रियल एस्टेट परियोजना में तय समय से अधिक देरी होती है, अनुबंध का उल्लंघन किया जाता है या स्वीकृत लेआउट में बिना अनुमति बदलाव किया जाता है, तो प्रभावित उपभोक्ता यूपी रेरा में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। नियमानुसार ऐसे मामलों में ब्याज, धनवापसी या अन्य वैधानिक राहत का प्रावधान है।

विशेषज्ञों ने निवेशकों से संपत्ति से जुड़े सभी दस्तावेज, अनुबंध और भुगतान की रसीदें सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में निवेश से पहले कानूनी और तकनीकी पहलुओं की जांच करना जरूरी है। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने रियल एस्टेट निवेश और रेरा से जुड़े सवाल पूछे। अधिकारियों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए सभी हितधारकों से रेरा अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बनाए रखने का आह्वान किया।