वाराणसी में नजरबंद किए गए कांग्रेसजन, प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप
वाराणसी। शहर में शुक्रवार को प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम से पहले कांग्रेस नेताओं को पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने का मामला सामने आया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब पार्टी कार्यकर्ता असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्वा शर्मा के खिलाफ पुतला दहन करने की तैयारी में थे। कार्यक्रम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित अपमान के विरोध में आयोजित किया जाना था।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर यह विरोध तय किया गया था। हालांकि, प्रशासन ने इसे रोकने के लिए महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल, युवा कांग्रेस महानगर अध्यक्ष चंचल शर्मा समेत कई नेताओं को उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया। इसके चलते प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं हो सका।
महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि खड़गे जैसे वरिष्ठ नेता के खिलाफ जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया, वह न केवल कांग्रेस पार्टी बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं का भी अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।
राघवेंद्र चौबे ने कहा कि कांग्रेस हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और शांतिपूर्ण विरोध में विश्वास करती रही है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में असहमति को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि नेताओं को घरों में कैद कर देना यह दर्शाता है कि सरकार विपक्ष की आवाज से भयभीत है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस बल का इस्तेमाल कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत बताते हुए कहा कि यदि इसी तरह विरोध को कुचला जाता रहा, तो यह संविधान के मूल सिद्धांतों के विपरीत होगा।
पार्टी पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस तरह की कार्रवाई से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटने वाला नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक संबंधित बयान पर सार्वजनिक माफी नहीं मांगी जाती, तब तक कांग्रेस का विरोध और आंदोलन जारी रहेगा और आगे इसे और तेज किया जाएगा।