मां-बाप की सेवा में कोताही करने वाली संतानों को करनी होगी सामुदायिक सेवा, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को शुरू हुआ भरण-पोषण न्यायालय 

वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण, संपत्ति की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में वाराणसी प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 'भरण-पोषण न्यायालय' (मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल) की व्यवस्था शुरू की है। इस संबंध में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) नितिन सिंह ने शुक्रवार को न्यायालय की कार्यप्रणाली, उद्देश्य और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।
 

वाराणसी। वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण, संपत्ति की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में वाराणसी प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 'भरण-पोषण न्यायालय' (मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल) की व्यवस्था शुरू की है। इस संबंध में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) नितिन सिंह ने शुक्रवार को न्यायालय की कार्यप्रणाली, उद्देश्य और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।

एसडीएम ने बताया कि यह न्यायालय विशेष रूप से उन मामलों की सुनवाई करेगा, जिनमें वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा की जा रही हो, उनका भरण-पोषण नहीं किया जा रहा हो या उनकी संपत्ति से जुड़े विवाद उत्पन्न हो रहे हों। न्यायालय का उद्देश्य केवल कानूनी समाधान उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि परिवारों में बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देना है।

उन्होंने बताया कि यदि किसी मामले में यह पाया जाता है कि संतान या कानूनी वारिस अपने माता-पिता अथवा वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल में लापरवाही बरत रहे हैं, तो न्यायालय उन्हें भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ सामुदायिक सेवा करने का भी निर्देश दे सकता है। इस व्यवस्था के तहत संबंधित व्यक्ति को वृद्धाश्रम या ओल्ड एज होम में जाकर वरिष्ठ नागरिकों की सेवा, देखभाल, बागवानी, साफ-सफाई तथा अन्य सामाजिक कार्यों में योगदान देना होगा।

एसडीएम ने कहा कि सामुदायिक सेवा के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित संस्थानों के प्रमुखों की निगरानी में कार्य कराया जाएगा। न्यायालय समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करेगा, ताकि आदेशों का प्रभावी अनुपालन हो और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर वातावरण मिल सके।

उन्होंने बताया कि अपनी समस्या लेकर आने वाले वरिष्ठ नागरिक संबंधित संस्थानों के प्रमुखों, नगर निगम के जोनल अधिकारियों अथवा अन्य अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इन शिकायतों को भरण-पोषण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुनवाई कर आवश्यक आदेश जारी किए जाएंगे।

एसडीएम नितिन सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने के साथ-साथ समाज में उनके सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील रहें और उनके अधिकारों का सम्मान करें।