बीएचयू में 19 दिन बाद खत्म हुआ ‘चीफ प्रॉक्टर हटाओ’ आंदोलन, कुलपति ने समाप्त कराई भूख हड़ताल, जांच समिति का गठन, चीफ प्रॉक्टर के नहीं कर पाएंगे अधिकारों का प्रयोग

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्रों की सुरक्षा, सम्मान, पारदर्शिता और न्याय से जुड़ी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की बीएचयू इकाई की ओर से चल रहा ‘चीफ प्रॉक्टर हटाओ’ आंदोलन शनिवार को समाप्त हो गया। लगातार 19 दिनों से जारी आंदोलन के बीच कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी धरनास्थल पर पहुंचे और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से वार्ता कर उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराई। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मांगों पर लिए गए निर्णयों और आगे की कार्ययोजना से संबंधित लिखित पत्र जारी होने के बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।
 

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्रों की सुरक्षा, सम्मान, पारदर्शिता और न्याय से जुड़ी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की बीएचयू इकाई की ओर से चल रहा ‘चीफ प्रॉक्टर हटाओ’ आंदोलन शनिवार को समाप्त हो गया। लगातार 19 दिनों से जारी आंदोलन के बीच कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी धरनास्थल पर पहुंचे और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से वार्ता कर उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराई। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मांगों पर लिए गए निर्णयों और आगे की कार्ययोजना से संबंधित लिखित पत्र जारी होने के बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।

आंदोलन की शुरुआत छात्रों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हुई थी। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मांगों के समर्थन में ज्ञापन, धरना, मौन प्रदर्शन, ओपन माइक, सुंदरकांड पाठ, शुद्धि-बुद्धि यज्ञ, प्रतीकात्मक शव शैया, शव यात्रा, पुतला दहन और मास मेलिंग जैसे विभिन्न माध्यमों से विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। मांगों पर निर्णायक कार्रवाई नहीं होने के विरोध में आठ अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की गई थी।

जांच समिति की रिपोर्ट तक चीफ प्रॉक्टर नहीं करेंगे छात्र मामलों से जुड़े अधिकारों का प्रयोग
विश्वविद्यालय के छात्र मामलों की समन्वय समिति (सीसीएसएम) की ओर से जारी निर्णय-पत्र के अनुसार, छात्रों के साथ कई दौर की वार्ता के बाद जांच समिति गठित करने पर सहमति बनी है। जांच समिति की रिपोर्ट आने तक चीफ प्रॉक्टर छात्र मामलों से संबंधित शक्तियों का प्रयोग नहीं करेंगे। इस अवधि में संबंधित निर्णय कुलपति द्वारा लिए जाएंगे। इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना 12 अक्टूबर 2026 को जारी किए जाने की बात कही गई है।

इसके अलावा 12 सितंबर 2026 को पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह के आवंटन से जुड़े मामले और चीफ प्रॉक्टर के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच भी समिति के माध्यम से कराई जाएगी। अनुशासनात्मक कार्रवाई से प्रभावित छात्रों को अपील का अवसर देने और उनकी अपीलों पर निर्णय की प्रक्रिया पूरी करने का भी आश्वासन दिया गया है।

परिसर की सुरक्षा और सुविधाओं में सुधार पर जोर
छात्रों की मांगों पर जारी निर्णय-पत्र में विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे शामिल हैं। परिसर में सीसीटीवी कैमरों और प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने का निर्णय लिया गया है। संवेदनशील स्थानों पर प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।

खाद्य दुकानों पर निर्धारित दर सूची का पालन सुनिश्चित करने के लिए विक्रेताओं को विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा जाएगा। परिसर में तेज और लापरवाही से वाहन चलाने पर नियंत्रण तथा खेल मैदानों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए भी व्यवस्था विकसित की जाएगी।

मधुबन क्षेत्र में 24 घंटे पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे। वहीं, सुरक्षा गार्डों के वेतन संबंधी मुद्दों की डीजीएमएस के दिशा-निर्देशों के आलोक में समीक्षा की जाएगी। निर्णय-पत्र के मुताबिक, इन कार्यों को 45 दिनों के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। शेष मांगों पर हुई प्रगति की समीक्षा महीने में दो बार की जाएगी।

लिखित आश्वासन के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
एबीवीपी बीएचयू अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर लगातार 19 दिनों तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया। आंदोलन का उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, प्रशासनिक जवाबदेही तय करना और छात्रहित से जुड़े मुद्दों का समाधान कराना था। कुलपति के धरनास्थल पर पहुंचने और मांगों पर लिखित निर्णय सामने आने के बाद भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

एबीवीपी बीएचयू मंत्री अनुराग तिवारी ने कहा कि मांगों पर लिखित निर्णय आना आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जांच समिति का गठन, अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरुद्ध अपील की व्यवस्था और परिसर की सुरक्षा में सुधार से जुड़े निर्णयों को निर्धारित समयसीमा में लागू किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके।

महामना को नमन कर पहुंचे काशी विश्वनाथ मंदिर
भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद छात्रों ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर नमन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद छात्र श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और दर्शन-पूजन किया। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि निर्णय-पत्र में किए गए आश्वासनों को तय समयसीमा के भीतर लागू किया जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि छात्रों की सुरक्षा, न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े शेष मुद्दों पर भी नियमित समीक्षा के माध्यम से ठोस समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।