ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर रद्द करने की मांग को लेकर बीएसएम ने चस्पा किए पोस्टर, चुनावी व्यवस्था के बहिष्कार का किया आह्वान
वाराणसी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने की मांग को लेकर भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा की वाराणसी इकाई ने पोस्टर अभियान चलाया। संगठन के सदस्यों ने परिसर की दीवारों पर पोस्टर चिपकाकर अपनी मांगों और राजनीतिक विचारों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा। इस दौरान मौजूदा चुनावी व्यवस्था को अलोकतांत्रिक बताते हुए उसके बहिष्कार और व्यापक सामाजिक-राजनीतिक बदलाव के लिए क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया गया।
मोर्चा के इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं के बीच चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाना बताया गया। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। साथ ही एसआईआर की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग उठाते हुए इसके विरोध में पोस्टर लगाए।
चुनावी व्यवस्था पर उठाए सवाल
भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा की वाराणसी इकाई ने अपने पोस्टरों के माध्यम से मौजूदा चुनावी व्यवस्था के प्रति असहमति जताई। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था को अलोकतांत्रिक मानते हुए उसका बहिष्कार किया जाना चाहिए। मोर्चा ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विद्यार्थियों के बीच वैचारिक बहस शुरू करने और युवाओं को इन विषयों पर जागरूक करने की कोशिश की।
क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ने की अपील
पोस्टर अभियान के दौरान संगठन की ओर से विद्यार्थियों और युवाओं से केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहने की अपील की गई। मोर्चा ने व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के लिए संगठित होकर संघर्ष करने तथा क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया। संगठन ने भारत में नवजनवादी क्रांति को सफल बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर भी जोर दिया।
परिसर में राजनीतिक बहस को आगे बढ़ाने का प्रयास
मोर्चा की वाराणसी इकाई ने पोस्टरों के जरिए एसआईआर और चुनावी व्यवस्था को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। संगठन का प्रयास इन मुद्दों को विद्यार्थियों के बीच चर्चा का विषय बनाना और अपनी मांगों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
हालांकि, अभियान में शामिल सदस्यों की संख्या, पोस्टर लगाए जाने को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और परिसर में इस पर किसी तरह की कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। संगठन की ओर से उठाई गई मांगों और अभियान के जरिए चुनावी व्यवस्था पर व्यक्त असहमति के बीच यह गतिविधि परिसर में राजनीतिक मुद्दों को लेकर चर्चा का हिस्सा बनी है।