बीएचयू शिक्षकों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत, निजी अस्पतालों में सीजीएचएस दरों पर उपचार, 18 निजी अस्पतालों के साथ एमओयू
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने अपने शिक्षकों, कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को बड़ी राहत देते हुए वाराणसी के 18 प्रमुख निजी अस्पतालों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में सीजीएचएस (केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना) की निर्धारित दरों पर उपचार उपलब्ध होगा, जिससे लाभार्थियों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।
कुलपति की मौजूदगी में हुआ समझौता
बुधवार को विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में कुलसचिव राजन श्रीवास्तव तथा संबंधित निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। यह पहल विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में जारी अधिसूचना के तहत की गई है, जिसके माध्यम से लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए सीजीएचएस स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाया गया है।
गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
इस अवसर पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने शिक्षकों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अस्पतालों के प्रतिनिधियों से कहा कि यह व्यवस्था दीर्घकालिक, प्रभावी और विश्वसनीय होनी चाहिए। साथ ही योजना के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक समर्पित ई-मेल शुरू करने का भी सुझाव दिया।
डिजिटल सत्यापन प्रणाली होगी विकसित
सीजीएचएस क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष प्रो. राकेश रमन ने बताया कि विश्वविद्यालय का कंप्यूटर सेंटर ऐसी डिजिटल व्यवस्था विकसित कर रहा है, जिसके माध्यम से सूचीबद्ध अस्पताल बीएचयू के शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके आश्रितों की पात्रता का तत्काल ऑनलाइन सत्यापन कर सकेंगे। इससे इलाज की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी होगी।
देशभर में बढ़ेगा अस्पतालों का नेटवर्क
विश्वविद्यालय ने बताया कि कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके परिवार देश के विभिन्न राज्यों में रहते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए देशभर के सीजीएचएस सूचीबद्ध निजी अस्पतालों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों में से बेड क्षमता, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, एनएबीएल मान्यता और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता सहित विभिन्न राज्यों की राजधानियों के 40 अस्पतालों का चयन किया गया है। प्रत्येक अस्पताल के साथ किया गया प्रारंभिक समझौता तीन वर्ष तक प्रभावी रहेगा। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और स्वास्थ्य सेवाओं के इस नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जाएगा।
नई व्यवस्था से मिलेगा आर्थिक लाभ
अब तक बीएचयू के शिक्षकों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को निजी अस्पतालों में उपचार के लिए अस्पताल की निर्धारित पूरी राशि का भुगतान करना पड़ता था, जबकि विश्वविद्यालय केवल सीजीएचएस की निर्धारित दरों के अनुसार ही प्रतिपूर्ति करता था। इस कारण दोनों राशियों के बीच का अंतर लाभार्थियों को अपनी जेब से देना पड़ता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपचार सीधे सीजीएचएस की निर्धारित दरों पर उपलब्ध होगा। इससे लाभार्थियों को अतिरिक्त आर्थिक भार से राहत मिलेगी और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं अधिक सुलभ हो सकेंगी।