वाराणसी में साइबर अपराधियों पर पुलिस का बड़ा प्रहार, एक साल में 59 गैंग का पर्दाफाश, 283 गिरफ्तार, पुलिस आयुक्त ने की समीक्षा
12,282 शिकायतों का निस्तारण, ठगी के 28.30 करोड़ रुपये कराए होल्ड, पीड़ितों को वापस मिली 5.10 करोड़ की रकम
15 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़, 10,876 मोबाइल नंबर और 9,462 आइएमईआइ ब्लॉक, 550 लोगों को साइबर अपराधियों के चंगुल से कराया मुक्त
वाराणसी। साइबर अपराधियों के संगठित नेटवर्क पर कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने बीते एक वर्ष में व्यापक कार्रवाई की है। पुलिस ने 59 साइबर गैंग का पर्दाफाश करते हुए उनके सरगना समेत 283 आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा। इस दौरान 15 अवैध कॉल सेंटरों का भी भंडाफोड़ किया गया। साइबर ठगी के शिकार लोगों को राहत पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर मिली 12,282 शिकायतों का निस्तारण किया गया। साथ ही ठगी की 28.30 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड कराई गई और कानूनी प्रक्रिया के तहत पीड़ितों को 5.10 करोड़ रुपये वापस दिलाए गए। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने सोमवार को साइबर अपराध से जुड़े मामलों की समीक्षा की। इस दौरान आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देशन और पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में साइबर अपराध के विरुद्ध यह अभियान चलाया गया। पुलिस उपायुक्त अपराध के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम पुलिस, साइबर सेल और संबंधित थानों की टीमों ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों और सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की। पुलिस आयुक्त ने उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए हैं।
निवेश और नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले 15 कॉल सेंटरों का भंडाफोड़
साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 15 अवैध कॉल सेंटरों को पुलिस ने पकड़ा। इन केंद्रों के जरिए निवेश पर अधिक मुनाफे का लालच देकर, नौकरी दिलाने के नाम पर और विदेशी नागरिकों को सरकारी अधिकारी बनकर डराकर ठगी की जा रही थी। पुलिस ने इन नेटवर्क से जुड़े आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। संगठित साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई में कुल 59 गैंग का पर्दाफाश किया गया और 283 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 21 के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।
डिजिटल अरेस्ट और सिम-बॉक्स गिरोह पर कार्रवाई
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी करने वाले गिरोह का भी पुलिस ने पर्दाफाश किया। एकता नगर, सामनेघाट और कैलाशपुरी में संचालित अवैध सिम-बॉक्स सेटअप पर छापेमारी कर छह 32-पोर्ट सिम-बॉक्स बरामद किए गए। इनमें कुल 192 सिम स्लॉट थे। इसके अलावा राउटर, गेटवे, वाई-फाई कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिले। इस मामले में दो आरोपित गिरफ्तार कर जेल भेजे गए।
10 हजार से अधिक मोबाइल नंबर और 9462 आइएमईआइ ब्लॉक
साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे संचार माध्यमों को निष्क्रिय करने के लिए पुलिस ने तकनीकी स्तर पर कार्रवाई की। इसके तहत 10,876 मोबाइल नंबर और 9,462 मोबाइल उपकरणों के आइएमईआइ नंबर ब्लॉक कराए गए। इसके अलावा साइबर अपराधियों की गतिविधियों में इस्तेमाल किए गए 17 चारपहिया वाहन भी बरामद किए गए।
550 लोगों को साइबर अपराधियों के चंगुल से कराया मुक्त
पुलिस ने साइबर अपराधियों के प्रलोभन में आकर मल्टीलेवल मार्केटिंग और अन्य साइबर गतिविधियों में फंसाए गए 550 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कराया। उनके परिजनों और संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर सुरक्षित सुपुर्दगी और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी कराई गई। वहीं, साइबर अपराध से बचाव के लिए विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों और जागरूकता शिविरों के माध्यम से 48 हजार से अधिक लोगों को जागरूक किया गया। उन्हें साइबर ठगी के तरीकों और बचाव के उपायों की जानकारी देने के साथ पंपलेट व पुस्तिकाएं भी वितरित की गईं।
वर्ष 2026 में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में 47.02 प्रतिशत की कमी
पुलिस की ओर से जारी तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 की अपेक्षा वर्ष 2026 में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की धनराशि में लगभग 47.02 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं, होल्ड अथवा लियन कराई गई धनराशि में 55.6 प्रतिशत और पीड़ितों को वापस कराई गई रकम में 73.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2026 में साइबर अपराध के मामलों में 219 एफआइआर भी दर्ज की गईं। पुलिस का दावा है कि शिकायतों के त्वरित निस्तारण, धनराशि होल्ड कराने और जागरूकता अभियानों का सकारात्मक असर सामने आया है।
अक्टूबर में दो मामलों में 1.65 करोड़ रुपये से अधिक होल्ड
अक्टूबर महीने में साइबर क्राइम सेल ने दो बड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 1 करोड़ 65 लाख 54 हजार रुपये होल्ड कराए। पहला मामला सिगरा थाना क्षेत्र का है। आठ अक्टूबर को अनुभव सिन्हा ने शिकायत की थी कि पेट्रोल पंप की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर उनसे 1.10 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। साइबर सेल ने संबंधित बैंक और साइबर अपराध समन्वय केंद्र से संपर्क कर 75.77 लाख रुपये होल्ड कराए।
दूसरा मामला भेलूपुर थाना क्षेत्र का है। 27 अक्टूबर को डॉ. आशीष कुमार ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 2.99 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस ने संबंधित बैंकों और साइबर अपराध समन्वय केंद्र से समन्वय कर 89.77 लाख रुपये होल्ड कराए। दोनों मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई से ठगी की बड़ी रकम सुरक्षित कराई जा सकी।
तकनीकी दक्ष पुलिसकर्मियों को थाना प्रभारी बनने में मिलेगी प्राथमिकता
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने साइबर क्राइम पुलिस और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्रवाई केवल शिकायतों के निस्तारण तक सीमित न रहे, बल्कि संगठित साइबर गिरोहों, अवैध कॉल सेंटरों और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। ब्लाइंड केस और जटिल मामलों का तकनीकी व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर खुलासा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, सोशल मीडिया, डिजिटल साक्ष्य और तकनीकी विश्लेषण की जानकारी रखने वाले पुलिसकर्मी अपनी दक्षता का बेहतर उपयोग करें। अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने, जटिल मामलों का सफल अनावरण करने और बेहतर परिणाम देने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसे योग्य और कर्मठ पुलिसकर्मियों को भविष्य में थाना प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व सौंपने में प्राथमिकता दी जाएगी। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बेहतर पुलिसिंग और तकनीकी दक्षता के आधार पर काम करने वाले कर्मियों को आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएंगे।