बीएचयू में अनुशासनहीनता पर सख्ती, तीन छात्र 15 दिन के लिए निलंबित, दो को नोटिस
वाराणसी। बीएचयू प्रशासन ने परिसर में अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से अनुशासनहीनता के एक मामले में कड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन छात्रों को 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है, जबकि दो अन्य छात्रों को नोटिस जारी करते हुए सख्त चेतावनी दी गई है।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार पल्लव सुमन, सत्यानारायण सिंह और श्यामल कुमार को उनके वर्तमान अध्ययन पाठ्यक्रम से 15 दिनों की अवधि के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान इन छात्रों के सभी शैक्षणिक अधिकार समाप्त रहेंगे और वे विश्वविद्यालय की किसी भी शैक्षणिक गतिविधि, कक्षा, परीक्षा अथवा अन्य अकादमिक कार्यों में भाग नहीं ले सकेंगे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि ये छात्र विश्वविद्यालय के किसी छात्रावास में निवास कर रहे हैं, तो उनका छात्रावास आवंटन और पुस्तकालय की सुविधा भी निलंबन अवधि के लिए तत्काल प्रभाव से समाप्त मानी जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि निलंबन अवधि के दौरान वे किसी छात्रावास परिसर में अनधिकृत रूप से पाए जाते हैं या पुस्तकालय सुविधा का उपयोग करते हैं, तो भविष्य में उन्हें छात्रावास आवंटन से स्थायी रूप से वंचित किया जा सकता है।
इसके साथ ही तीनों निलंबित छात्रों को उनके शेष शैक्षणिक कार्यकाल के दौरान किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन, आंदोलन या अन्य अनुशासनहीन गतिविधियों में शामिल न होने की सख्त चेतावनी दी गई है। प्रशासन का कहना है कि दोबारा इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुधारात्मक कदम के रूप में इन छात्रों के लिए 10 घंटे की अनिवार्य सामुदायिक सेवा और अधिकतम पांच काउंसलिंग सत्रों में भाग लेना भी अनिवार्य किया है। ये काउंसलिंग सत्र किसी पेशेवर परामर्शदाता द्वारा संचालित किए जाएंगे। इन दायित्वों की पूर्ति से संबंधित रिपोर्ट डीन ऑफ स्टूडेंट्स कार्यालय के माध्यम से उप कुलसचिव (अकादमिक) को सौंपी जाएगी। इसके अलावा छात्रों के अभिभावकों या संरक्षकों तथा संबंधित पीएचडी पर्यवेक्षकों को भी इस कार्रवाई की औपचारिक सूचना दी जाएगी।
इस मामले में दो अन्य छात्र, पुनीत कुमार मिश्रा और शिवम सोनकर पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। दोनों को सख्त चेतावनी देते हुए नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने कहा है कि यदि भविष्य में वे किसी भी प्रकार की अनुशासनहीन गतिविधि या धरना-प्रदर्शन में शामिल पाए गए, तो विश्वविद्यालय नियमों के तहत उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
इन दोनों छात्रों को भी 10 घंटे की सामुदायिक सेवा और अधिकतम पांच काउंसलिंग सत्रों में भाग लेना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोहराया कि परिसर में शांति, अनुशासन और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।