मणिकर्णिका पर ऐतिहासिक धरोहरों को कथित नुकसान के विरोध में बीएचयू छात्रों का प्रदर्शन, बोले, काशी को संवारिए लेकिन उसकी आत्मा को न मिटाइए

सनातन संस्कृति की जीवंत प्रतीक मानी जाने वाली काशी में विकास परियोजनाओं के नाम पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को कथित क्षति पहुंचाए जाने के आरोपों ने एक बार फिर बहस को जन्म दे दिया है। बीएचयू के छात्रों ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित एवं जीर्णोद्धारित मणिकर्णिका घाट तथा उससे जुड़ी प्राचीन संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। सरकार से मांग किया कि काशी को संवारिए लेकिन उसकी आत्मा को न मिटाइए। 
 

वाराणसी। सनातन संस्कृति की जीवंत प्रतीक मानी जाने वाली काशी में विकास परियोजनाओं के नाम पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को कथित क्षति पहुंचाए जाने के आरोपों ने एक बार फिर बहस को जन्म दे दिया है। बीएचयू के छात्रों ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित एवं जीर्णोद्धारित मणिकर्णिका घाट तथा उससे जुड़ी प्राचीन संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। सरकार से मांग किया कि काशी को संवारिए लेकिन उसकी आत्मा को न मिटाइए। 

छात्रों ने बताया कि अठारहवीं शताब्दी में देवी अहिल्याबाई होल्कर ने काशी सहित देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर मंदिरों, घाटों और धर्मशालाओं का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराया। काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण (1777–1780 ई.) और मणिकर्णिका घाट का पुनरुद्धार (1791 ई.) उनकी दूरदर्शिता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण है। मणिकर्णिका घाट केवल एक स्थापत्य संरचना नहीं, बल्कि सनातन परंपरा में मोक्ष, करुणा और मानवीय मूल्यों का प्रतीक माना जाता है।

आयोजक धर्मेंद्र पाल ने कहा कि काशी को केवल एक विकास परियोजना के रूप में देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि देवी अहिल्याबाई होल्कर की विरासत का संरक्षण प्राथमिकता के साथ किया जाए और विकास व संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित हो। उत्कर्ष कृष्ण गणेश ने स्पष्ट किया कि छात्र विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास जो आस्था, परंपरा और ऐतिहासिक स्मृतियों को नष्ट करे, स्वीकार्य नहीं हो सकता।

संतोष त्रिपाठी ने सरकार द्वारा प्रस्तुत कथित एआई-जनित प्रचार वीडियो को भ्रामक बताते हुए कहा कि इससे जमीनी सच्चाई छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की। वहीं गौरव पाल ने देवी अहिल्याबाई होल्कर की क्षतिग्रस्त प्रतिमा को महिला शक्ति और ऐतिहासिक विरासत का अपमान बताते हुए उसे सम्मानपूर्वक उचित स्थान पर पुनः स्थापित करने की मांग रखी।

विरोध प्रदर्शन में उत्कर्ष कृष्ण गणेश, धर्मेंद्र पाल, अजय सिंह, उत्सव कुमार, गौरव पाल, संतोष त्रिपाठी, सचिन, हिमांशु, अक्षय कुमार, सूरज शुक्ला, अभिनव पाल, अमित कुमार, जंग बहादुर, दीपक सहित दर्जनों छात्र शामिल रहे।