बीएचयू ने आरटीआई मामले में 11 सितंबर को सुनवाई तय की, अधिवक्ता संतोष त्रिपाठी ने मांगा स्थगन या ऑनलाइन सुनवाई

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में खेल मैदानों के उपयोग एवं उससे संबंधित अभिलेखों को लेकर दाखिल आरटीआई प्रथम अपील पर विश्वविद्यालय के संकाय प्रमुख कार्यालय, कला संकाय द्वारा सुनवाई निर्धारित की गई है। बीएचयू के कार्यालय द्वारा जारी नोटिस के अनुसार प्रथम अपील संख्या BANHU/A/E/26/00203 दिनांक 09.08.2026 की सुनवाई 11 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे संयुक्त कुलसचिव एवं प्रथम अपीलीय प्राधिकारी, कला संकाय के कक्ष में निर्धारित की गई है।
 

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में खेल मैदानों के उपयोग एवं उससे संबंधित अभिलेखों को लेकर दाखिल आरटीआई प्रथम अपील पर विश्वविद्यालय के संकाय प्रमुख कार्यालय, कला संकाय द्वारा सुनवाई निर्धारित की गई है। बीएचयू के कार्यालय द्वारा जारी नोटिस के अनुसार प्रथम अपील संख्या BANHU/A/E/26/00203 दिनांक 09.08.2026 की सुनवाई 11 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे संयुक्त कुलसचिव एवं प्रथम अपीलीय प्राधिकारी, कला संकाय के कक्ष में निर्धारित की गई है।

नोटिस में अपीलकर्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। साथ ही केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी एवं अनुभाग अधिकारी, कला संकाय को भी सुनवाई के समय उपस्थित रहने तथा आरटीआई आवेदन एवं अपील से संबंधित संपूर्ण अभिलेख/दस्तावेज साथ रखने का निर्देश दिया गया है।

अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वह वर्तमान में वाराणसी से बाहर हैं और निर्धारित तिथि पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को लिखित आवेदन भेजकर सुनवाई स्थगित कर किसी अन्य सुविधाजनक तिथि पर करने अथवा ऑनलाइन माध्यम से अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगी है।

उन्होंने अपने आवेदन में यह भी स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न हो पाने को प्रथम अपील में रुचि की कमी न माना जाए। उन्होंने अनुरोध किया है कि यदि स्थगन अथवा ऑनलाइन सुनवाई संभव न हो तो उनके लिखित पक्ष, मूल आरटीआई आवेदन, प्रथम अपील एवं उपलब्ध संबंधित अभिलेखों के आधार पर मामले का विधि के अनुसार निस्तारण किया जाए।

अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि “मेरा उद्देश्य केवल आरटीआई में मांगी गई सूचनाओं और संबंधित अभिलेखों की पूर्ण एवं स्पष्ट उपलब्धता सुनिश्चित कराना है। सुनवाई में अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलना आवश्यक है।” उन्होंने कहा कि यदि ऑनलाइन सुनवाई अथवा वैकल्पिक तिथि प्रदान की जाती है तो वह अपने सभी बिंदुओं और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर अपना पक्ष विस्तार से प्रस्तुत करेंगे।