बीएचयू का स्पष्टीकरण: 2.65 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का सिर्फ आकलन हुआ, NGT ने नहीं लगाया जुर्माना
वाराणसी। बीएचयू प्रशासन ने मीडिया में प्रकाशित उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें यह दावा किया गया था कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने विश्वविद्यालय पर लगभग 2.65 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि मीडिया रिपोर्टों में जिस 2.65 करोड़ रुपये की राशि का उल्लेख किया गया है, वह उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) द्वारा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के संबंध में किया गया प्रारंभिक आकलन है। यह राशि न तो NGT द्वारा स्वीकृत की गई है और न ही अधिकरण ने इसे विश्वविद्यालय पर अधिरोपित करने का कोई आदेश दिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि 11 अगस्त 2025 को पारित अपने आदेश में NGT ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया था कि वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए तथा विश्वविद्यालय को समुचित सुनवाई का अवसर प्रदान कर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का निर्धारण और अधिरोपण करने की प्रक्रिया पूरी करे।
बीएचयू ने कहा कि जैसे ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आवश्यक नोटिस प्राप्त होगा, विश्वविद्यालय अपने सभी तथ्यात्मक, विधिक और तकनीकी पक्ष बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करेगा, ताकि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति निर्धारण की प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप पूरी हो सके। विश्वविद्यालय ने बताया कि यह मामला जुलाई 2024 में दायर एक शिकायत से जुड़ा है, जिसमें वर्ष 2023 और उससे पहले विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षों के कथित कटान का आरोप लगाया गया था।
बीएचयू ने यह भी स्पष्ट किया कि NGT ने अपने आदेश में प्रत्येक कटे अथवा गिरे हुए वृक्ष के बदले प्रतिपूरक पौधारोपण करने का निर्देश दिया था, जिसका विश्वविद्यालय ने पूर्ण अनुपालन किया है। विश्वविद्यालय की ओर से लगाए गए पौधों की संख्या, उनके संरक्षण तथा पौधों की जीवित रहने की दर (Survival Rate) सहित विस्तृत अनुपालना रिपोर्ट अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी है। विश्वविद्यालय के अनुसार, NGT ने इस अनुपालना रिपोर्ट का संज्ञान भी लिया है।
बीएचयू प्रशासन ने कहा कि मामले की विधिक प्रक्रिया अभी जारी है और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का अंतिम निर्धारण उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विश्वविद्यालय का पक्ष सुनने के बाद ही किया जाएगा।