ट्रॉमा सेंटर में शुरू हुई घुटने की रोबोटिक सर्जरी, देश का पहला सरकारी अस्पताल बना बीएचयू, पूर्वांचल को बड़ी सौगात 

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में अत्याधुनिक तकनीक को समाहित करते हुए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) सहयोग से चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में घुटने की रोबोटिक सर्जरी (Robotic-Assisted Knee Surgical System) का विधिवत उद्घाटन कर संचालन प्रारंभ कर दिया गया। इसके साथ ही संस्थान देश का पहला सरकारी चिकित्सा केंद्र बन गया है, जहां ‘नॉन-सीटी आधारित’ रोबोटिक नी सर्जरी प्रणाली स्थापित कर सफलतापूर्वक क्रियान्वित की गई है।
 

वाराणसी। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में अत्याधुनिक तकनीक को समाहित करते हुए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) सहयोग से चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में घुटने की रोबोटिक सर्जरी (Robotic-Assisted Knee Surgical System) का विधिवत उद्घाटन कर संचालन प्रारंभ कर दिया गया। इसके साथ ही संस्थान देश का पहला सरकारी चिकित्सा केंद्र बन गया है, जहां ‘नॉन-सीटी आधारित’ रोबोटिक नी सर्जरी प्रणाली स्थापित कर सफलतापूर्वक क्रियान्वित की गई है।

अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक सर्जरी में उच्च सटीकता, रोगी-विशिष्ट एलाइनमेंट, कम रक्तस्राव, कम दर्द और शीघ्र रिकवरी सुनिश्चित करती है। इससे मरीजों को बेहतर दीर्घकालिक परिणाम प्राप्त होंगे और उन्हें निजी अस्पतालों या महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार सहित आसपास के राज्यों के रोगियों के लिए यह सुविधा किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।

परियोजना को वाराणसी जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग से साकार किया गया। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल तथा मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह की प्रशासनिक भूमिका उल्लेखनीय रही। इस पहल को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी का मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। उद्घाटन समारोह में कुलपति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने ट्रॉमा सेंटर की सराहना करते हुए कहा कि यह पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के लिए भी एक महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र है।

ट्रॉमा सेंटर के प्रोफेसर-इन-चार्ज प्रो. सौरभ सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि विभिन्न संस्थानों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रोबोटिक तकनीक की शुरुआत सरकारी अस्पतालों में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

सीएसआर सहयोग के अंतर्गत 100 आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी में प्रयुक्त कंज्यूमेबल्स उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे रियायती दरों पर इस उन्नत सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। औरंगाबाद निवासी 74 वर्षीय अवधेश कुमार का घुटना प्रत्यारोपण रोबोटिक तकनीक से सफलतापूर्वक किया गया। सर्जरी टीम का नेतृत्व प्रो. सौरभ सिंह ने किया, जिसमें डॉ. कुमार प्रशांत, डॉ. आलोक राय, डॉ. वामिक अंसारी, डॉ. अभिजीत कुंवर तथा एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. कविता और डॉ. रीना शामिल रहीं।