ज्येष्ठ मास की शुरुआत: इस बार 60 दिन का महीना, अधिकमास में नहीं होंगे मांगलिक कार्य
वाराणसी। हिंदू पंचांग के अनुसार शनिवार से ज्येष्ठ मास की शुरुआत हो गई है। इस वर्ष विशेष बात यह है कि ज्येष्ठ मास में अधिकमास लगने के कारण इसकी अवधि 60 दिनों की होगी। इसमें करीब 35 दिन व्रत और त्योहारों के रहेंगे, जबकि 30 दिन अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के रूप में माने जाएंगे। ज्योतिषविदों के अनुसार अधिकमास हर तीन साल में आता है और इस दौरान हिंदू वर्ष 13 महीनों का हो जाता है।
ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष शुद्ध ज्येष्ठ रहेगा, जिसमें मांगलिक कार्य संपन्न होंगे। इसके बाद शुक्ल और कृष्ण पक्ष अधिकमास के रूप में रहेगा, जिसमें विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे। हालांकि इस अवधि में जप, तप, दान-पुण्य, पूजा-अर्चना, जलयात्रा और पंचक्रोशी यात्रा का विशेष महत्व होता है और इनका फल सामान्य से दस गुना अधिक माना जाता है।
अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। इसके बाद फिर शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष प्रारंभ होगा, जो 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगा। इस दौरान भगवान श्रीहरि विष्णु और हनुमानजी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है, जिससे सुख-शांति और कष्टों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिषविदों के अनुसार ज्येष्ठ में अधिकमास अब 11 साल बाद यानी 2037 में आएगा।
इस बार ज्येष्ठ मास में आठ बड़ा मंगल पड़ेंगे, जो 5 मई से शुरू होकर 23 जून तक रहेंगे। इन दिनों शहर के हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी और जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया जाएगा।
इसके अलावा इस अवधि में कई प्रमुख व्रत और त्योहार भी पड़ेंगे, जिनमें देवर्षि नारद जयंती, संकष्टी गणेश चतुर्थी, अपरा एकादशी, वट सावित्री व्रत, शनि जयंती, गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी और ज्येष्ठ पूर्णिमा प्रमुख हैं। ज्येष्ठ मास में धार्मिक गतिविधियों की अधिकता के चलते मंदिरों और तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है।