नाग पंचमी से पहले सजने लगा काशी का कारकोटक नाग तीर्थ, नागकूप में छिपे हैं कई रहस्य
जैतपुरा स्थित प्राचीन तीर्थ में तैयारियां तेज, नाग देवता के साथ महर्षि पतंजलि-पाणिनि की होगी पूजा, कालसर्प दोष निवारण के लिए भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
वाराणसी। नाग पंचमी के पर्व को लेकर काशी के जैतपुरा स्थित प्राचीन कारकोटक नाग तीर्थ में तैयारियां तेज हो गई हैं। नाग देवता को समर्पित यह तीर्थ अपनी प्राचीन धार्मिक मान्यताओं, महर्षि पतंजलि से जुड़े संदर्भ और रहस्यमयी नागकूप के कारण विशेष पहचान रखता है। नाग पंचमी पर यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचकर नाग देवता के साथ महर्षि पतंजलि और उनके गुरु महर्षि पाणिनि की पूजा-अर्चना करते हैं।
महर्षि पतंजलि की तपोस्थली मानी जाती है
मंदिर के पुजारी पंडित कुंदन के अनुसार धार्मिक मान्यता में महर्षि पतंजलि को भगवान शेषनाग का अवतार माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने इसी स्थान पर तपस्या की थी। यही वजह है कि नाग पंचमी के दिन यहां नाग देवता के साथ महर्षि पतंजलि की पूजा का विशेष महत्व है।
नागकूप में प्राचीन शिवलिंग की मान्यता
कारकोटक नाग तीर्थ की सबसे खास विशेषता यहां स्थित प्राचीन नागकूप है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कूप के भीतर एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। कूप की गहराई और संरचना के कारण सामान्य दिनों में इसके दर्शन सहज नहीं होते। विशेष अवसरों पर सफाई और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान शिवलिंग के दर्शन किए जाते हैं।
पाताल लोक से जुड़ी हैं लोक मान्यताएं
नागकूप को लेकर स्थानीय स्तर पर कई कथाएं प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि कूप के भीतर से एक मार्ग नागलोक अथवा पाताल लोक तक जाता है। हालांकि यह धार्मिक आस्था और लोकविश्वास का विषय है, लेकिन इसी रहस्य के कारण नागकूप के प्रति श्रद्धालुओं की जिज्ञासा बनी रहती है।
‘छोटे गुरु-बड़े गुरु’ की पूजा
नाग पंचमी पर यहां नाग देवता के साथ महर्षि पतंजलि और उनके गुरु महर्षि पाणिनि की पूजा की जाती है। इसी गुरु-शिष्य परंपरा के चलते स्थानीय स्तर पर इसे ‘छोटे गुरु-बड़े गुरु’ की पूजा भी कहा जाता है। श्रद्धालु नाग देवता के दर्शन के साथ गुरु परंपरा का स्मरण करते हैं।
कालसर्प दोष निवारण के लिए भी जुटते हैं श्रद्धालु
कारकोटक नाग तीर्थ में नाग पंचमी के अवसर पर कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाने की मान्यता है। श्रद्धालु नाग देवता का पूजन, अभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं तेज
नाग पंचमी पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में साफ-सफाई, पूजा स्थल और श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। काशी के अन्य नाग मंदिरों और शिवालयों के साथ कारकोटक नाग तीर्थ में भी पर्व को लेकर विशेष उत्साह है। आस्था, नाग उपासना, गुरु-शिष्य परंपरा और नागकूप से जुड़ी लोकमान्यताओं का अनोखा संगम कारकोटक नाग तीर्थ को काशी की प्राचीन धार्मिक विरासत में विशिष्ट स्थान देता है। नाग पंचमी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।