ODOP योजना से चमके बनारसी लकड़ी के खिलौने, GI टैग से वैश्विक बाजार में बढ़ी पहचान
वाराणसी। काशी के पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने में “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” योजना अहम भूमिका निभा रही है। योगी आदित्यनाथ की पहल पर संचालित इस योजना का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। खासकर बनारसी वुडन टॉय (लकड़ी के खिलौने) उद्योग को रफ्तार मिली है।
इस क्षेत्र से जुड़े कारीगर रामेश्वर सिंह बताते हैं कि GI टैग मिलने के बाद उनके उत्पादों को एक नई पहचान और विश्वसनीयता मिली है। इससे बनारस के लकड़ी के खिलौनों की मांग न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ी है। पहले जहां यह कला सीमित बाजार तक ही सिमटी थी, अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी सराहना हो रही है।
बढ़ती मांग के बीच कारीगरों की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। रामेश्वर सिंह का मानना है कि इस पारंपरिक कला को शिक्षा प्रणाली से जोड़ना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी इसे सीख सके। इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे, साथ ही इस कला को भी संरक्षित किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि बनारसी लकड़ी के खिलौनों की एक खासियत यह भी है कि इनमें इस्तेमाल होने वाले रंग पूरी तरह नॉन-टॉक्सिक होते हैं, जो बच्चों के लिए सुरक्षित हैं। इन खिलौनों का निर्माण पारंपरिक तकनीकों से किया जाता है, जिसमें कुंड लकड़ी पर विशेष प्रक्रिया के जरिए आकर्षक डिजाइन बनाए जाते हैं।
ODOP योजना के तहत कारीगरों को आर्थिक सहायता भी मिल रही है। रामेश्वर सिंह ने बताया कि उन्हें मुद्रा लोन जैसी सुविधाओं का लाभ मिला, जिससे कम ब्याज दर पर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। इसके अलावा “वन स्टेशन वन प्रोडक्ट” योजना के तहत रेलवे स्टेशनों पर उत्पाद बेचने का अवसर मिलने से उनकी आय में भी वृद्धि हुई है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “लोकल फॉर वोकल” अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अंत में उन्होंने सरकार से मांग की कि वाराणसी में GI टैग उत्पादों के लिए एक विशेष हब विकसित किया जाए, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटक आसानी से इन उत्पादों को खरीद सकें और कारीगरों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।