बनारसी स्वाद को मिली नई उड़ान, पारंपरिक व्यंजनों की देशभर में बढ़ी मांग
वाराणसी। धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की नगरी काशी अब अपने पारंपरिक व्यंजनों के कारण भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही है। तिरंगा बर्फी, बनारसी ठंडाई, लस्सी, कचौरी, बनारसी पान, लौंग लता और सर्दियों में मिलने वाला प्रसिद्ध मलाईयो अब केवल बनारस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश-विदेश तक अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुका है। स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के चलते बनारसी व्यंजनों को नई पहचान और बड़ा बाजार मिला है।
व्यापारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से वाराणसी के पारंपरिक उत्पादों और खानपान को “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” (ODOP) तथा जीआई टैग जैसी योजनाओं के माध्यम से बढ़ावा मिला है। इससे न केवल बनारसी व्यंजनों की लोकप्रियता बढ़ी है, बल्कि छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों को भी नई आर्थिक मजबूती मिली है।
दुकानदारों के अनुसार पहले सड़क किनारे छोटी दुकानों पर अपने पारंपरिक व्यंजन बेचने वाले लोगों को वह पहचान नहीं मिल पाती थी, जिसके वे हकदार थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। बड़ी संख्या में देश और विदेश से आने वाले पर्यटक बनारस के पारंपरिक स्वाद का आनंद लेने के लिए विशेष रूप से इन दुकानों तक पहुंच रहे हैं। पर्यटक बनारसी पान, मलाईयो, ठंडाई और कचौरी जैसे व्यंजनों की जमकर सराहना कर रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बनारसी व्यंजन अब केवल स्थानीय खानपान का हिस्सा नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। बड़ी संख्या में युवा खाद्य व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। कई युवाओं ने पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत कर अपने कारोबार को नई दिशा दी है।
व्यापारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार द्वारा पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने से बनारस की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत हुई है। खाद्य व्यवसाय के बढ़ने से हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों का मानना है कि “एक जिला एक उत्पाद” जैसी योजनाओं ने छोटे व्यापारियों को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। आज बनारसी स्वाद देश के बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच रहा है। इससे काशी की सांस्कृतिक विरासत और खानपान की परंपरा को नई ऊंचाइयां मिल रही हैं और बनारसी व्यंजनों की खुशबू पूरी दुनिया में फैल रही है।