स्कूलों में हर शनिवार बैगलेस डे, स्थानीय कला, शिल्प और रचनात्मक कार्य सीखेंगे विद्यार्थी, 11 सप्ताह में बच्चों को मिलेंगी कौशल आधारित गतिविधियां

समग्र शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में इस शैक्षिक सत्र प्रत्येक शनिवार को बैगलेस डे मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नियमित किताबी पढ़ाई से अलग व्यावहारिक अनुभव और कौशल आधारित गतिविधियों से जोड़ना है। अगस्त से नवंबर के बीच कुल 11 शनिवार को विद्यालयों में अलग-अलग गतिविधियां कराई जाएंगी।
 

वाराणसी। समग्र शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में इस शैक्षिक सत्र प्रत्येक शनिवार को बैगलेस डे मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नियमित किताबी पढ़ाई से अलग व्यावहारिक अनुभव और कौशल आधारित गतिविधियों से जोड़ना है। अगस्त से नवंबर के बीच कुल 11 शनिवार को विद्यालयों में अलग-अलग गतिविधियां कराई जाएंगी।

निदेशालय की ओर से जारी शैक्षणिक कैलेंडर में बैगलेस डे के लिए गतिविधियों की रूपरेखा तय की गई है। इसके तहत विद्यार्थियों को स्थानीय कला, शिल्प, पर्यावरण और रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जाएगा। बच्चों को मिट्टी से खिलौने और मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें कुम्हार की कार्यशाला का भ्रमण भी कराया जा सकता है, जहां वे मिट्टी से वस्तुएं तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझेंगे।

विद्यालयों में कला-शिल्प प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें विद्यार्थी अपनी बनाई हुई वस्तुओं को प्रदर्शित करेंगे। इसके अलावा उन्हें रंग, चित्रकला, हस्तशिल्प और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों में सृजनात्मक सोच विकसित करने के साथ उनके भीतर छिपी प्रतिभा को सामने लाना है।

हाथों से काम कर सीखेंगे नई चीजें
बैगलेस डे के दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई के पारंपरिक तरीके से अलग अनुभव दिया जाएगा। उन्हें विभिन्न टास्क सौंपे जाएंगे, जिनमें हाथों से काम करने, वस्तुएं बनाने और स्थानीय कला एवं शिल्प को समझने का अवसर मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में व्यावहारिक ज्ञान के साथ आत्मविश्वास, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित होगी।

पर्यावरण आधारित गतिविधियों को भी बैगलेस डे का हिस्सा बनाया गया है। इसके लिए विद्यालयों में पौधे, बीज और जैविक खाद से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। विद्यार्थी पौधरोपण, बीज तैयार करने और प्रकृति संरक्षण जैसी गतिविधियों में भाग लेकर पर्यावरण के प्रति जागरूक होंगे।

हर विद्यालय को 6500 रुपये का बजट
बैगलेस डे की गतिविधियों के संचालन के लिए प्रत्येक विद्यालय को शासन की ओर से 6500 रुपये का बजट उपलब्ध कराया जाएगा। इस धनराशि से मिट्टी, रंग, ब्रश, चार्ट, स्टेशनरी और हस्तशिल्प से संबंधित सामग्री खरीदी जा सकेगी। पर्यावरण संबंधी गतिविधियों के लिए पौधे, बीज और जैविक खाद भी खरीदी जा सकेगी।

बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि महानिदेशक के निर्देश पर नो बैगलेस डे के तहत विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। बच्चों से नए-नए टास्क कराए जा रहे हैं, ताकि वे पढ़ाई के साथ उपयोगी हुनर भी सीख सकें। इससे विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने और उनके सर्वांगीण विकास में मदद मिलेगी।