दिन में बाबा काल भैरव तो रात्रि में मां वाराही देवी संभालती हैं काशी की सुरक्षा की कमान, केवल ढाई घंटे के लिए खुलता है मां का दरबार
- मां वाराही देवी काशी की 'गुप्त संरक्षिका' और प्रधान 'क्षेत्रपालिका' हैं
सनातन धर्म की सबसे जीवंत नगरी काशी (वाराणसी) के कण-कण में रहस्य और चमत्कार छिपे हैं। हम सभी जानते हैं कि बाबा काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है, जिनके आदेश के बिना इस नगरी में यमराज भी प्रवेश नहीं कर सकते। लेकिन काशी की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा भी परम सत्य है, जिससे बहुत से लोग आज भी अनजान हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जहां दिन के समय बाबा काल भैरव पूरी काशी की सुरक्षा संभालते हैं, वहीं सूर्यास्त के बाद रात्रि में इस पावन नगरी की रक्षा की जिम्मेदारी स्वयं मां वाराही देवी निभाती हैं।
जब सो जाती है दुनिया, तब जागती हैं मां वाराही
स्थानीय और तांत्रिक मान्यताओं के अनुसार, रात होते ही मां वाराही देवी पूरे शहर में गश्त लगाती हैं और नगर की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं। वे काशी की 'गुप्त संरक्षिका' और प्रधान 'क्षेत्रपालिका' हैं। यही कारण है कि मां वाराही के दर्शन का नियम और समय भी बेहद अनोखा है।
ढाई घंटे का दरबार और दिन में विश्राम
चूंकि मां वाराही रात भर जागकर काशी की रक्षा करती हैं, इसलिए ऐसी मान्यता है कि वे दिन के समय विश्राम करती हैं। इसी वजह से मान मंदिर घाट के पास एक संकरी गली में स्थित इनका मंदिर चौबीस घंटे में केवल ढाई घंटे के लिए ही खुलता है। श्रद्धालु सुबह 5:00 बजे से लेकर 7:30 बजे तक ही माता के दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद मंदिर के कपाट दिन भर के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
भूमिगत गर्भगृह और झरोखे से दर्शन की अनूठी परंपरा
इस मंदिर की बनावट भी इसके रहस्य को बढ़ाती है। मां वाराही का विग्रह जमीन से एक मंजिल नीचे यानी भूमिगत (अंडरग्राउंड) है। गर्भगृह में आम भक्तों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। भक्त मंदिर के फर्श पर बने दो छोटे-छोटे झरोखों (सुराखों) से नीचे झांकते हैं, जहां से मां के अलौकिक मुख और उनके चरणों के दिव्य दर्शन प्राप्त होते हैं।
शत्रु बाधा और अदृश्य संकटों से मिलती है मुक्ति
स्कंद पुराण के काशी खंड में वर्णित 64 योगिनियों में मां वाराही का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रीविद्या परंपरा में उन्हें देवी ललिता त्रिपुरा सुंदरी की सेना की सेनापति (दंडनाथा) माना गया है। मान्यता है कि जो भी भक्त भोर की बेला में मां वाराही के इस गुप्त दरबार में आकर दर्शन करता है, उसके जीवन से बड़े से बड़ा कोर्ट-कचहरी का विवाद, शत्रु बाधा, तंत्र-मंत्र का प्रभाव और हर प्रकार का अदृश्य भय हमेशा के लिए नष्ट हो जाता है।