छह साल की उम्र में विश्व मंच पर चमका काशी का लाल, आवर्त सारणी सुनाकर बनाए कई विश्व रिकॉर्ड
वाराणसी। काशी की नन्ही प्रतिभा युवान नागेश श्रीवास्तव ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति और वैज्ञानिक ज्ञान के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाते हुए कई प्रतिष्ठित विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। महज छह वर्ष की आयु में युवान ने आवर्त सारणी (पीरियॉडिक टेबल) के सभी रासायनिक तत्वों को सीधे और उल्टे क्रम में सबसे तेज गति से सुनाकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरे वाराणसी में खुशी और गर्व का माहौल है।
वर्तमान में युवान सामने घाट स्थित सनबीम एकेडमी में कक्षा दो के छात्र हैं। इतनी कम उम्र में विज्ञान जैसे जटिल विषय पर उनकी पकड़ और अद्भुत स्मरण क्षमता ने शिक्षकों और विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया है। आवर्त सारणी के सभी तत्वों को क्रमवार और रिवर्स ऑर्डर में याद रखना सामान्य रूप से बड़े विद्यार्थियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन युवान ने इसे सहजता से कर दिखाया।
युवान एक शिक्षित और प्रेरणादायक पारिवारिक वातावरण से आते हैं। उनके पिता नागेश कुमार श्रीवास्तव वाराणसी जिला न्यायालय में आपराधिक अधिवक्ता हैं और शिक्षा के क्षेत्र से भी जुड़े रहे हैं। उनकी माता जाह्नवी गौतम काशी हिंदू विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी कर रही हैं तथा इससे पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर में वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर चुकी हैं। परिवार का कहना है कि युवान बचपन से ही नई चीजें सीखने और ज्ञान अर्जित करने के प्रति अत्यंत जिज्ञासु रहे हैं।
युवान की उपलब्धि को कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय रिकॉर्ड संस्थाओं ने मान्यता प्रदान की है। उन्होंने एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, वर्ल्ड एक्सीलेंस बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स तथा इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। इनमें से कुछ संस्थाओं से उन्हें आधिकारिक प्रमाणन प्राप्त हो चुका है, जबकि कुछ की औपचारिक प्रक्रिया जारी है।
शिक्षाविदों का मानना है कि इतनी कम उम्र में इस प्रकार की उपलब्धि असाधारण एकाग्रता, नियमित अभ्यास और उत्कृष्ट मार्गदर्शन का परिणाम है। युवान की सफलता यह संदेश देती है कि यदि बच्चों को अनुकूल वातावरण, सही दिशा और प्रोत्साहन मिले तो वे छोटी उम्र में भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। युवान नागेश श्रीवास्तव की यह उपलब्धि न केवल वाराणसी बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता विज्ञान के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा भी दे रही है।