पांच साल की उम्र में जूडो-कराटे, संगीत और अध्यात्म में रुचि, चकित कर रही त्रिशान्त की प्रतिभा
रिपोर्टर : ओमकार नाथ
वाराणसी। भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में काशी का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। इसी काशी नगरी को एक बार फिर एक अनमोल तोहफा मिला है। महज पांच वर्ष की उम्र में असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहा बालक त्रिशान्त शर्मा आज लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बन चुका है। इतनी कम उम्र में खेल, संगीत और अध्यात्म का ऐसा अद्भुत संगम विरले ही देखने को मिलता है।
मूल रूप से समस्तीपुर (बिहार) के रहने वाले होमी प्रसाद शर्मा पिछले चार वर्षों से अपनी पत्नी मनु शर्मा के साथ वाराणसी में निवास कर रहे हैं। उनका पुत्र त्रिशान्त अभी मात्र 5 वर्ष और 8 दिन का है, लेकिन इस छोटी सी उम्र में उसने कई उल्लेखनीय उपलब्धियां अपने नाम कर ली हैं। माता-पिता के अनुसार, त्रिशान्त की प्रतिभा बचपन से ही दिखाई देने लगी थी, जिसे उन्होंने पूरे समर्पण के साथ निखारने का प्रयास किया।
खेलों में शानदार प्रदर्शन
त्रिशान्त ने अब तक विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पांच स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) जीते हैं। वह जूडो और कराटे जैसे मार्शल आर्ट में भी निरंतर अभ्यास कर रहा है। आगामी मार्च माह में उसकी ब्लैक बेल्ट परीक्षा प्रस्तावित है। यदि वह इसमें सफल होता है, तो वह देश के सबसे कम उम्र के ब्लैक बेल्ट धारकों में तीसरे स्थान पर आ सकता है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि होगी।
संगीत में भी कमाल
खेलों के साथ-साथ त्रिशान्त का रुझान संगीत की ओर भी गहरा है। वह एक-दो नहीं बल्कि पांच अलग-अलग संगीत वाद्य यंत्र बजाने में दक्ष है। खास बात यह है कि वह पियानो पर पूरे आत्मविश्वास के साथ राष्ट्रगान बजा लेता है। इतनी कम उम्र में यह क्षमता उसे भारत के सबसे कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की श्रेणी में खड़ा करती है।
आध्यात्मिकता से जुड़ा नन्हा मन
त्रिशान्त केवल खेल और संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका जुड़ाव आध्यात्म से भी है। वह अपने माता-पिता के साथ नियमित रूप से मंदिर जाता है और भजन-कीर्तन में भाग लेता है। उसके पिता बताते हैं कि त्रिशान्त स्वभाव से शांत, अनुशासित और बेहद धैर्यवान है। वह हर बात को ध्यान से सुनता है और समझने की कोशिश करता है।
धोनी बनने का सपना
त्रिशान्त का सपना भविष्य में एक सफल क्रिकेटर बनने का है। वह भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अपना आदर्श मानता है और उन्हीं की तरह देश का नाम रोशन करना चाहता है। माता-पिता भी उसके सपनों को लेकर पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। कम उम्र में प्रतिभा, अनुशासन और संस्कारों का ऐसा संगम न केवल उसके परिवार, बल्कि पूरी काशी के लिए गर्व का विषय है। सही मार्गदर्शन और निरंतर समर्थन मिला, तो नन्हा त्रिशान्त आने वाले समय में देश और दुनिया में भारत का नाम रोशन कर सकता है।