ठंड बढ़ते ही बाजार में छाया बनारसी मलइयो का स्वाद, सर्दी की खास मिठाई की डिमांड, मुंह में डालते ही घुल जाती है मिठास
वाराणसी। मौसम ने करवट ली तो काशी में सर्दियों की आहट के साथ ही खानपान का जायका भी बदलने लगा है। बारिश और चक्रवाती तूफान के प्रभाव से तापमान में गिरावट आई और ठंडक बढ़ गई। सोमवार की सुबह पूरी काशी कोहरे की सफेद चादर में लिपटी नजर आई। सर्दी की दस्तक के साथ ही बनारस की मशहूर मौसमी मिठाई मलइयो की डिमांड बढ़ गई है। इसका स्वाद लेने के लिए स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी दुकानों पर पहुंचने लगे हैं।
ठंड के साथ बढ़ा मलइयो का जायका
सर्दियों में काशी की पहचान बन चुकी मलइयो का इंतजार स्थानीय लोगों को पूरे साल रहता है। ओस की बूंदों और सर्द मौसम में तैयार होने वाली यह खास मिठाई अपने हल्के, झागदार और मलाईदार स्वाद के लिए मशहूर है। मौसम में ठंडक बढ़ने के साथ ही शहर की पारंपरिक मिठाई की दुकानों पर इसकी उपलब्धता बढ़ने लगी है। सुबह के समय लोग मलइयो का स्वाद लेने पहुंच रहे हैं। काशी घूमने आने वाले पर्यटक भी इस खास मिठाई को चखे बिना वापस नहीं जाना चाहते।
नाविक समाज के अध्यक्ष विनोद कुमार निषाद ने बताया कि मौसम में बदलाव और ठंड बढ़ने के साथ ही बनारस की प्रसिद्ध मलइयो बाजार में उपलब्ध होने लगी है। सर्दियों में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इसे खूब पसंद करते हैं।
84 घाटों पर कोहरे की चादर, नावों का संचालन प्रभावित
दूसरी ओर, सुबह गंगा के तट से लेकर काशी के सभी 84 घाटों तक घना कोहरा छाया रहा। कम दृश्यता के कारण गंगा और घाटों का विहंगम नजारा देखने पहुंचे देशी-विदेशी पर्यटकों को परेशानी हुई। कोहरे का असर नावों के संचालन पर भी पड़ा। सुबह के समय नावों का परिचालन प्रभावित रहा और करीब नौ बजे के बाद स्थिति सामान्य हो सकी।
मौसम की इस करवट ने एक ओर घाटों को कोहरे की खूबसूरत चादर में ढक दिया तो दूसरी ओर बनारसी मलइयो की मिठास के साथ सर्दियों के पारंपरिक खानपान की रौनक भी लौटा दी है। अब काशी की सुबह गंगा के घाटों पर कोहरे के नजारे और दुकानों पर मलइयो के स्वाद के नाम होने लगी है।