चेतगंज की नक्कटैया में दिखेगा एयर शो, झांकियों के जरिये हिंदू-मुस्लिम एकता और मोबाइल के दुष्प्रभाव को लेकर करेंगे जागरूक

काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाली चेतगंज की नक्कटैया इस बार समसामयिक मुद्दों और सामाजिक सरोकारों का संदेश लेकर आएगी। 29 अक्टूबर को आयोजित होने वाले 140वें नक्कटैया मेले में भारतीय वायुसेना के एयर शो, हिंदू-मुस्लिम एकता, बच्चों पर मोबाइल के दुष्प्रभाव, पड़ोसी देशों में आतंकवाद और उग्रवादी गतिविधियों जैसे विषयों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। वहीं, नीम करौली बाबा के जीवन प्रसंग और राम-रावण युद्ध के मंचन के जरिये धार्मिक और पौराणिक प्रसंगों को भी जीवंत किया जाएगा। पूरी रात चलने वाले इस आयोजन में काशी की लोककला, परंपरा और सामाजिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
 

29 अक्टूबर को निकलेगी झांकियां, नीम करौली बाबा के जीवन प्रसंग से लेकर राम-रावण युद्ध तक का होगा मंचन

140वें वर्ष में प्रवेश कर रहा चेतगंज का ऐतिहासिक नक्कटैया मेला, रात 12 बजे जिलाधिकारी करेंगे उद्घाटन, पूरी रात चलेगा मेला 
 
आगे बढ़ेंगे लाग विमान, बच्चों को मोबाइल के दुरुपयोग से बचने और सामाजिक एकता का संदेश देंगी झांकियां

वाराणसी। काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाली चेतगंज की नक्कटैया इस बार समसामयिक मुद्दों और सामाजिक सरोकारों का संदेश लेकर आएगी। 29 अक्टूबर को आयोजित होने वाले 140वें नक्कटैया मेले में भारतीय वायुसेना के एयर शो, हिंदू-मुस्लिम एकता, बच्चों पर मोबाइल के दुष्प्रभाव, पड़ोसी देशों में आतंकवाद और उग्रवादी गतिविधियों जैसे विषयों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। वहीं, नीम करौली बाबा के जीवन प्रसंग और राम-रावण युद्ध के मंचन के जरिये धार्मिक और पौराणिक प्रसंगों को भी जीवंत किया जाएगा। पूरी रात चलने वाले इस आयोजन में काशी की लोककला, परंपरा और सामाजिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

झांकियों के जरिये बताएंगे मोबाइल के दुष्प्रभाव
नक्कटैया में इस बार बच्चों और युवाओं के बीच बढ़ते मोबाइल के इस्तेमाल तथा उसके दुष्प्रभावों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। झांकियों के माध्यम से मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव और इसके चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आने वाली घटनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, इन समस्याओं से बचने और मोबाइल का संतुलित इस्तेमाल करने का संदेश भी दिया जाएगा।

आयोजन से जुड़े अमित राज जायसवाल ने बताया कि उनकी संस्था कुछ बच्चों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण देती है। इसके बाद नक्कटैया के माध्यम से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच प्रदान किया जाता है। झांकियों के जरिये बच्चों को सामाजिक मुद्दों से जोड़ने और लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

हिंदू-मुस्लिम एकता और आतंकवाद पर भी होगा प्रहार
इस बार की झांकियों में सामाजिक सद्भाव और एकजुटता का संदेश भी प्रमुखता से नजर आएगा। अमित राज जायसवाल के अनुसार, बांग्लादेश के संदर्भ में मुस्लिम समाज की एकजुटता को दर्शाने वाली झांकी निकाली जाएगी। इसके साथ ही पड़ोसी देशों में आतंकवाद और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े विषयों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इन झांकियों के माध्यम से समाज में एकता, जागरूकता और देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाने का प्रयास होगा।

नीम करौली बाबा के जीवन प्रसंग का होगा मंचन
धार्मिक और पौराणिक प्रसंग भी मेले की रौनक बढ़ाएंगे। नीम करौली बाबा पर आधारित झांकी में उनके जीवन से जुड़ा वह प्रसंग दिखाया जाएगा, जिसमें उन्हें ट्रेन से उतारे जाने की घटना का चित्रण होगा। इसके अलावा राम-रावण युद्ध का मंचन भी झांकियों के माध्यम से किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों में धार्मिक आस्था के साथ लोकनाट्य और पारंपरिक कला की झलक देखने को मिलेगी।

अंग्रेजों की कुरीतियों के खिलाफ शुरू हुई थी नक्कटैया
श्री चेतगंज रामलीला समिति के उपाध्यक्ष तनुज पांडेय ने बताया कि बाबा फतेहराम ने अंग्रेजों के दौर में प्रचलित कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों को स्वांग और लीला के माध्यम से जनता के सामने लाने के उद्देश्य से नक्कटैया लीला की शुरुआत की थी। समय के साथ यह आयोजन काशी की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बन गया। आज भी इस परंपरा के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को उठाने और जनजागरण का प्रयास किया जाता है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष मेले का 140वां आयोजन है। समिति लोकप्रिय अध्यक्ष अजय गुप्ता बच्चू के नेतृत्व में भव्य आयोजन की तैयारियों में जुटी है। परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी ऐसी झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी, जो मनोरंजन के साथ समाज को सकारात्मक संदेश देंगी।

रात 12 बजे होगा उद्घाटन, पूरी रात चलेगा मेला
तनुज पांडेय ने बताया कि 29 अक्टूबर की रात 12 बजे चेतगंज थाने के सामने जिलाधिकारी मेले का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद लाग विमान और विभिन्न विषयों पर आधारित झांकियां आगे बढ़ेंगी। पूरी रात चलने वाला यह आयोजन अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है। उन्होंने काशीवासियों से अपील की कि वे इस बार अपने बच्चों के साथ नक्कटैया मेला देखने आएं। मोबाइल के दुरुपयोग और उसके दुष्प्रभावों को दर्शाने वाली झांकियां बच्चों को जागरूक करने और उन्हें सही दिशा में प्रेरित करने में सहायक होंगी।

परंपरा और आधुनिक सरोकारों का संगम

140वें वर्ष की नक्कटैया में जहां काशी की ऐतिहासिक लोकपरंपरा की झलक मिलेगी, वहीं एयर शो, मोबाइल के दुष्प्रभाव, सामाजिक एकता और आतंकवाद जैसे समसामयिक विषयों के माध्यम से बदलते समय की चुनौतियों को भी सामने रखा जाएगा। यही विशेषता इस आयोजन को केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजागरण का एक प्रभावी मंच बनाती है।