असि नदी के पुनरूद्धार के साथ काशी के तीन तालाबों का भी होगा कायाकल्प, तीन चरणों में होगा कार्य

विकास प्राधिकरण द्वारा असि नदी के व्यापक जीर्णोद्धार और पुनर्जीवन के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई है। शुक्रवार को प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें बीएचयू आईटी टीम, ई एंड वाई (EY) तकनीकी टीम और प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें असि नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और पर्यावरणीय सुधार हेतु वैज्ञानिक तथा समन्वित रणनीति तैयार की गई। काशी के तीन तालाबों का भी कायाकल्प कराया जाएगा। 
 

वाराणसी। विकास प्राधिकरण द्वारा असि नदी के व्यापक जीर्णोद्धार और पुनर्जीवन के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई है। शुक्रवार को प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें बीएचयू आईटी टीम, ई एंड वाई (EY) तकनीकी टीम और प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें असि नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और पर्यावरणीय सुधार हेतु वैज्ञानिक तथा समन्वित रणनीति तैयार की गई। काशी के तीन तालाबों का भी कायाकल्प कराया जाएगा। 

उपाध्यक्ष ने बताया कि असि नदी का पुनर्जीवन न केवल वाराणसी के जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि शहरी जल प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जीर्णोद्धार परियोजना को तीन चरणों में क्रियान्वित किया जाएगा। इसके अंतर्गत नदी के फ्रॉम टू मैपिंग, विस्तृत क्षेत्र निर्धारण, तकनीकी सर्वेक्षण, तटीय संरचनाओं के सुधार और प्रदूषण स्रोतों की पहचान को प्राथमिकता दी जाएगी।

बीएचयू आईटी टीम को नदी के पूरे बहाव मार्ग का आधुनिक तकनीकों ड्रोन मैपिंग, डिजिटल सर्वे, हाइड्रोलॉजिकल एनालिसिस और 3D मैपिंग के माध्यम से विस्तृत सर्वेक्षण का दायित्व सौंपा गया है। ये तकनीकें नदी की वास्तविक स्थिति, जलधारण क्षमता और प्रवाह अवरोधों की वैज्ञानिक पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। वहीं ई एंड वाई टीम जलग्रहण क्षेत्र, नदी किनारों की पर्यावरणीय स्थिति और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का विश्लेषण कर पर्यावरण संतुलन बहाल करने के उपाय सुझाएगी।

बैठक में असि नदी से जुड़े तीन प्रमुख तालाबों कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के अपस्ट्रीम स्थित तालाब, कंदवा तालाब और कंचनपुर तालाब को पुनर्जीवन परियोजना में सम्मिलित करने का निर्णय लिया गया। इन तालाबों के सौंदर्यीकरण, गहरीकरण, जल संचयन क्षमता बढ़ाने तथा सीवेज-मुक्त रखने हेतु विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उपाध्यक्ष ने कहा कि इन तालाबों का संरक्षण, अस्सी नदी के पुनर्जीवन के साथ-साथ स्थानीय जल प्रबंधन और धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों की स्वच्छता में भी बड़ा योगदान देगा।

उन्होंने सभी विभागों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी ढंग से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही, तकनीकी संस्थानों के साथ सतत संवाद और नियमित प्रगति रिपोर्ट सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में अधीक्षण अभियंता अजय पवार सहित सभी तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए और निर्धारित समय सीमा में सर्वेक्षण एवं प्रारूप रिपोर्ट तैयार करने पर सहमति व्यक्त की।