चोलापुर के केदारनाथ संस्कृत महाविद्यालय में फर्जी नियुक्ति और वित्तीय गड़बड़ी का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

जनपद के चोलापुर क्षेत्र स्थित केदारनाथ संस्कृत महाविद्यालय में फर्जी नियुक्ति, कथित फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय निवासी सच्चिदानन्द पाण्डेय ने मामले को सार्वजनिक करते हुए उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि प्रकरण शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
 

वाराणसी। जनपद के चोलापुर क्षेत्र स्थित केदारनाथ संस्कृत महाविद्यालय में फर्जी नियुक्ति, कथित फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय निवासी सच्चिदानन्द पाण्डेय ने मामले को सार्वजनिक करते हुए उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि प्रकरण शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

 

शिकायत के अनुसार महाविद्यालय में दो नियुक्तियां नियमों के विपरीत और कथित रूप से फर्जी तरीके से की गई हैं। आरोप है कि प्राचार्य पद के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र तैयार कर इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी कराई गई और बाद में प्रकरण को अग्रिम कार्रवाई के लिए सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय को भेज दिया गया।

 

इसके अलावा शिकायत में महाविद्यालय के प्रबंधक पद के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि कॉलेज के फंड खाते से कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से धनराशि की निकासी की गई। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि पिछले पांच से छह वर्षों से महाविद्यालय का संचालन बिना विधिवत एवं वैध प्रबंधक के किया जा रहा है, जो प्रशासनिक नियमों के विपरीत है।

सच्चिदानन्द पाण्डेय का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता का मामला है, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने संबंधित विभागों से स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है, ताकि दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। 

फिलहाल इस संबंध में महाविद्यालय प्रशासन या विश्वविद्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले के सार्वजनिक होने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। अभिभावकों व छात्रों के बीच भी चिंता देखी जा रही है।