त्योहारी सीजन में हवाई किराया छू रहा आसमान, दिल्ली का टिकट 11 हजार पार, सीटों की उपलब्धता कम होने से टिकट महंगे 

त्योहारी सीजन शुरू होते ही विमानन कंपनियों ने हवाई किराये में इजाफा कर दिया है। 24 सितंबर से शुरू होने वाले पितृ विसर्जन से लेकर छठ पूजा तक बड़ी संख्या में लोग दूसरे शहरों से अपने घर लौटेंगे। दिवाली और छठ के दौरान यात्रियों की भीड़ सबसे अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में विमानों में सीटों की उपलब्धता कम होने के साथ किराया भी दो से तीन गुना तक बढ़ गया है।
 

वाराणसी। त्योहारी सीजन शुरू होते ही विमानन कंपनियों ने हवाई किराये में इजाफा कर दिया है। 24 सितंबर से शुरू होने वाले पितृ विसर्जन से लेकर छठ पूजा तक बड़ी संख्या में लोग दूसरे शहरों से अपने घर लौटेंगे। दिवाली और छठ के दौरान यात्रियों की भीड़ सबसे अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में विमानों में सीटों की उपलब्धता कम होने के साथ किराया भी दो से तीन गुना तक बढ़ गया है।

आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध किराये के अनुसार आम दिनों में दिल्ली का हवाई किराया करीब तीन से साढ़े तीन हजार रुपये के बीच रहता है। त्योहारी सीजन में यही किराया बढ़कर 11 हजार रुपये से अधिक पहुंच गया है। यात्रियों की बढ़ती मांग और सीमित सीटों के कारण किराये में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

मुंबई जाने वाली अधिकतर उड़ानों में भी सीटें लगभग फुल हो चुकी हैं। वेबसाइट पर कई विमानों में सिर्फ चार से पांच सीटें ही उपलब्ध दिखाई दे रही हैं। आम दिनों में मुंबई का हवाई किराया पांच से छह हजार रुपये के आसपास रहता है, जो त्योहारी सीजन में बढ़कर करीब 15 हजार रुपये तक पहुंच गया है।

इसी तरह हैदराबाद और बंगलूरू के लिए भी यात्रियों को अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। आम दिनों में हैदराबाद का किराया पांच से छह हजार रुपये के बीच होता है, लेकिन फिलहाल यह बढ़कर करीब 15 हजार रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, बंगलूरू का किराया भी बढ़कर अधिकतम करीब 16 हजार रुपये तक पहुंच गया है।

त्योहारी सीजन में बड़ी संख्या में दूसरे शहरों में रहने वाले लोग अपने घर लौटते हैं। दिवाली और छठ पूजा के बाद वापसी की भीड़ भी बढ़ जाती है। पूर्वांचल आने वाले यात्रियों ने पहले से ही टिकटों की बुकिंग शुरू कर दी है। सीटों की उपलब्धता लगातार घटने से आने वाले दिनों में हवाई किराये में और बढ़ोतरी की आशंका है। कम समय में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए हवाई सफर अब जेब पर भारी पड़ रहा है।