रथयात्रा से पहले काशी में श्रद्धा व भक्ति का महापर्व, 29 जून से 20 जुलाई तक होंगे श्रीजगन्नाथ महोत्सव के विविध आयोजन
वाराणसी। काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रमुख आयोजनों में शामिल भगवान श्रीजगन्नाथ महाप्रभु की वार्षिक रथयात्रा महोत्सव-2026 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी, असि की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 29 जून से 20 जुलाई तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, डोली यात्रा, ऐतिहासिक रथयात्रा मेला और बहुड़ा यात्रा का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर महोत्सव को भव्य बनाने की अपील की गई है।
ट्रस्ट के अनुसार काशी की आध्यात्मिक पहचान शैव और वैष्णव परंपराओं के अद्भुत समन्वय में निहित है। असि स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर को श्रीक्षेत्र पुरी धाम का प्रतीकात्मक स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन से भक्तों को पुरी धाम के दर्शन के समान पुण्य प्राप्त होता है।
ऐतिहासिक विवरण के अनुसार वर्ष 1790 में पुरी के तत्कालीन मुख्य पुजारी पंडित स्वामी तेजोनिधि ब्रह्मचारी ने काशी में भगवान श्रीजगन्नाथ के विग्रह की स्थापना कराई थी। इसके बाद भोंसले राज्य के दीवान पंडित बेनीराम शापुरी और कटक रियासत के दीवान पंडित विश्वंभर शापुरी ने असि घाट पर मंदिर का निर्माण कराया। वर्ष 1802 से शापुरी परिवार के संरक्षण में यहां निरंतर ऐतिहासिक रथयात्रा मेला आयोजित किया जा रहा है।
महोत्सव का शुभारंभ 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर प्रातः 5:11 बजे भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के महास्नान एवं जलाभिषेक के साथ होगा। इसके बाद 30 जून से 14 जुलाई तक भगवान अनवसर (विश्राम) काल में रहेंगे। इस दौरान भगवान के स्वास्थ्य लाभ की परंपरा के तहत तैयार किया जाने वाला औषधीय काढ़ा प्रतिदिन श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।
14 जुलाई को भगवान का दुर्लभ नवयौवन दर्शन कराया जाएगा। परंपरा के अनुसार इस अवसर पर भगवान को परवल के जूस का भोग लगाया जाएगा। 15 जुलाई को असि स्थित मंदिर से भगवान की भव्य डोली यात्रा निकलेगी, जो दुर्गाकुंड, नवाबगंज, राम मंदिर, कश्मीरीगंज, खोजवां, शंकुलधारा, बैजनत्था और कामाख्या मंदिर मार्ग होते हुए पंडित बेनीराम बाग (रथयात्रा क्षेत्र) पहुंचेगी।
16 से 18 जुलाई तक ऐतिहासिक रथयात्रा मेले में भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा रथ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। तीनों दिनों में प्रातः आरती, भोग, संध्या आरती और रात्रि महाआरती सहित नियमित पूजा-अर्चना होगी। 18 जुलाई की मध्यरात्रि महाआरती के साथ मेले का समापन होगा। इसके बाद 19 जुलाई को बहुड़ा यात्रा के माध्यम से भगवान पुनः असि स्थित मंदिर लौटेंगे तथा 20 जुलाई से नियमित दर्शन-पूजन प्रारंभ हो जाएगा।
ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने कहा कि श्रीजगन्नाथ रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और सनातन परंपरा का महापर्व है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से इस दिव्य आयोजन में सहभागी बनकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने और धर्म-संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।