तीन इंजेक्शन के बाद काबू में आया रामनगर की रामलीला में आया हाथी, गोरखपुर से पहुंची डॉक्टरों की टीम ने किया उपचार 

रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के दौरान रविवार को उत्पात मचाने वाले हाथी धनराज को तीन इंजेक्शन देने के बाद काबू में किया जा सका। गोरखपुर से आए प्राणि उद्यान के डॉक्टरों की टीम ने हाथी की जांच की। फिलहाल उसे प्रभु नारायण इंटर कॉलेज के सामने रासलीला मैदान में बांधकर रखा गया है। वन विभाग और हाथी मालिक के कर्मचारी उसकी निगरानी कर रहे हैं। सोमवार को भी हाथी को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। सुरक्षा के लिए रामनगर थाने के चार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
 

रासलीला मैदान में रखा गया है हाथी, वन विभाग और पुलिस कर रही निगरानी 

वाराणसी। रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के दौरान रविवार को उत्पात मचाने वाले हाथी धनराज को तीन इंजेक्शन देने के बाद काबू में किया जा सका। गोरखपुर से आए प्राणि उद्यान के डॉक्टरों की टीम ने हाथी की जांच की। फिलहाल उसे प्रभु नारायण इंटर कॉलेज के सामने रासलीला मैदान में बांधकर रखा गया है। वन विभाग और हाथी मालिक के कर्मचारी उसकी निगरानी कर रहे हैं। सोमवार को भी हाथी को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। सुरक्षा के लिए रामनगर थाने के चार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

डॉक्टरों की टीम के मुताबिक, हाथी मस्ती की अवस्था में है। एक हथिनी को देखने के बाद वह बिदक गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, हाथी के मस्ती में रहने की अवधि करीब दो महीने तक हो सकती है। इस दौरान उसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ले जाने से बचना चाहिए। ऐसे में रामलीला में हाथी के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन पर सवाल उठे हैं।

रविवार को हाथी को नियंत्रित करने में वन विभाग की टीम को करीब 11.30 घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी थी। इस दौरान हाथी ने महावत छापलू को कुचल दिया था। घायल महावत का बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में उपचार चल रहा है। हाथी ने कई बिजली के खंभे उखाड़ने के साथ दुकानों और दीवारों को भी नुकसान पहुंचाया था। अब मालिक उसे वापस आजमगढ़ ले जाने की तैयारी कर रहा है।

अनुमति नहीं लेने की बात आई सामने
दुर्ग प्रशासन के सुरक्षाधिकारी राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, रामलीला में हाथी के उपयोग के लिए अनुमति लेने की परंपरा नहीं रही है। इसी वजह से इस वर्ष भी अनुमति नहीं ली गई। रामलीला में काशीराज परिवार के डॉ. अनंत नारायण सिंह और उनके पूर्वजों के हाथी पर सवार होकर शामिल होने की परंपरा पुरानी है। हालांकि, पिछले करीब 60 वर्षों से रामलीला के लिए किराये पर हाथी मंगाए जा रहे हैं। पिछले 15 वर्षों से आजमगढ़ के तीन लोगों के यहां से हाथी बुलाए जाते रहे हैं। डीएफओ निधि चौहान ने बताया कि रामलीला में शामिल हाथियों के लाइसेंस और वन विभाग की अनुमति से संबंधित पहलुओं की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।