शंकराचार्य पर मुकदमे के बाद सियासी हलचल बढ़ी, सपा-कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल विद्यामठ पहुंचा, समर्थन का किया ऐलान
वाराणसी। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों में मुकदमा दर्ज होने के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। सपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को विद्यामठ पहुंचा। इस दौरान शंकराचार्य को नैतिक समर्थन का ऐलान किया। वहीं पूरे प्रकरण को राजनीति से प्रेरित बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
हाल ही में शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में पुलिस की सक्रियता बढ़ी है और संबंधित पक्षों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर आगे की विधिक कार्रवाई भी की जा सकती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
सोमवार को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारी व कार्यकर्ता विद्यामठ पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने शंकराचार्य से मुलाकात कर उन्हें समर्थन का भरोसा दिलाया। समाजवादी पार्टी के अंबेडकर वाहिनी के महासचिव सत्यप्रकाश सोनकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार धर्मगुरुओं का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद आस्था और सम्मान का प्रतीक है, ऐसे में उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि जांच हो तो वह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए।
वहीं कांग्रेस प्रतिनिधियों ने भी मामले में जल्दबाजी से बचने की बात कही। उनका कहना था कि किसी भी संत-महात्मा की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला अत्यंत संवेदनशील होता है, इसलिए तथ्यों की पुष्टि के बाद ही कदम उठाया जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो कानून अपना कार्य अवश्य करे, लेकिन बिना पर्याप्त साक्ष्य किसी की छवि धूमिल करना उचित नहीं है।
इस घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य प्रकरण अब केवल धार्मिक और कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीतिक रंग भी जुड़ गया है। एक ओर विपक्षी दल निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर पुलिस प्रशासन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जुटा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रिया इस मामले को और चर्चा में ला सकती है।