सात साल बाद सात महायोग के संयोग में मनेगी लोलार्क छठ, लोलार्क कुंड में स्नान को उमड़ेगा आस्था का सैलाब

काशी में सूर्योपासना और आस्था के प्रमुख पर्व लोलार्क छठ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर 17 सितंबर को भदैनी स्थित ऐतिहासिक लोलार्क कुंड में प्रसिद्ध लोलार्क छठ का आयोजन होगा। इस बार करीब सात साल बाद लोलार्क षष्ठी पर सात महायोग बनने का संयोग बताया जा रहा है। इनमें सिद्धि योग, राजयोग और पांच महापुरुष योग शामिल हैं। विशेष संयोग के चलते इस बार पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।
 

संतान प्राप्ति की कामना से स्नान करेंगे दंपती

लोलार्क षष्ठी पर सिद्धि योग, राजयोग और पांच महापुरुष योग बनने का दावा 

सुबह 6:31 से 10:26 बजे तक स्नान-दान का सर्वोत्तम मुहूर्त

वाराणसी। काशी में सूर्योपासना और आस्था के प्रमुख पर्व लोलार्क छठ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर 17 सितंबर को भदैनी स्थित ऐतिहासिक लोलार्क कुंड में प्रसिद्ध लोलार्क छठ का आयोजन होगा। इस बार करीब सात साल बाद लोलार्क षष्ठी पर सात महायोग बनने का संयोग बताया जा रहा है। इनमें सिद्धि योग, राजयोग और पांच महापुरुष योग शामिल हैं। विशेष संयोग के चलते इस बार पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।

पूर्वांचल के अलावा दिल्ली, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से श्रद्धालुओं के काशी पहुंचने की संभावना है। संतान प्राप्ति की कामना से बड़ी संख्या में दंपती लोलार्क कुंड में स्नान कर लोलार्केश्वर महादेव का दर्शन-पूजन करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुंड में श्रद्धापूर्वक स्नान करने से संतान प्राप्ति की बाधाएं दूर होती हैं।

उदया तिथि के कारण 17 सितंबर को पर्व
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष एवं ज्योतिषविद प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 16 सितंबर की सुबह 8:55 बजे से 17 सितंबर की सुबह 10:26 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के कारण पर्व 17 सितंबर को मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 'लोल' का अर्थ चंचल और 'अर्क' का अर्थ सूर्य होता है।

स्नान-दान के लिए सुबह का समय शुभ
आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3:55 से 5:40 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त 5:41 से 6:30 बजे तक रहेगा। वहीं सुबह 6:31 से 10:26 बजे तक स्नान, दान और पूजा का सर्वोत्तम समय रहेगा। इसके बाद सूर्यास्त तक श्रद्धालु कुंड में स्नान और लोलार्केश्वर महादेव का पूजन कर सकेंगे। सर्वार्थ सिद्धि योग के बनने से भी पर्व के फल में वृद्धि की मान्यता है।

दंपती करते हैं विशेष स्नान
लोलार्क छठ का प्रमुख विधान संतान प्राप्ति की कामना से लोलार्क कुंड में स्नान करना है। मान्यता के अनुसार दंपती स्नान के बाद एक फल चढ़ाकर वहीं छोड़ देते हैं और संतान प्राप्ति तक उसे ग्रहण नहीं करते। स्नान के दौरान पहने गए वस्त्र भी कुंड पर छोड़ने की परंपरा है। लोलार्केश्वर महादेव मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज के अनुसार लोलार्क कुंड को सूर्य कुंड माना जाता है। मान्यता है कि सूर्यदेव के रथ का पहिया यहां धंस गया था, जिससे कुंड का निर्माण हुआ।

राजा के रोग दूर होने और पुत्र प्राप्ति की मान्यता
महंत के अनुसार कूचबिहार के एक राजा के चर्मरोग से पीड़ित होने और संतान न होने की मान्यता है। काशी यात्रा के दौरान लोलार्क कुंड में स्नान के बाद उनका रोग दूर हुआ और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। मनोकामना पूरी होने पर उन्होंने कुंड में सोने की सीढ़ियां और सात मन तांबे की सात जालियां बनवाईं।